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शनिवार, 11 जून 2011
विश्व मीडिया में भी छाया रामदेव का अनशन, कहा हिल गई भारत सरकार

दिल्ली के रामलीला मैदान पर शुरु हुआ भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा रामदेव के अनशन का जिक्र विश्व भर में हो रहा है। विदेशी मीडिया भी रामदेव के अनशन को तवज्जों दे रहा है। ज्यादातर मीडिया संस्थानों ने लिखा है कि भारत में एक योगी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है। वहीं कई मीडिया संस्थानों ने रामदेव के अनशन को राजनीति से प्रेरित बताया है।आस्ट्रेलिया की न्यूज वेबसाइट न्यूज डॉटकॉम डॉटएयू ने अपनी बाबा के आंदोलन की रिपोर्ट का शीर्षक दिया है कि योग गुरु के राजनीतिक अनशन ने भारत को हिला दिया है।ब्रिटेन के अखबार इंडीपेंडेंट की वेबसाइट ने लिखा है भारत में योग गुरु ने भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए धर्मयुद्ध छेड़ दिया है।
वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में दिल्ली के पांच सितारा होटल में कैबिनेट मंत्रियों और रामदेव के बीच हुई मुलाकात को तमाशा बताते हुए बाबा के आंदोलन की तैयारियों पर भी कटाक्ष किया है।
संयुक्त अरब अमीरात के अखबार खलीज टाइम्स की वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बाबा के अनशन ने भारत की सरकार को हिला दिया है। रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया है कि बाबा रामदेव के अनशन में शामिल होने के लिए भारत के कोने-कोने से लोग आए हैं।
अमेरिका के अखबार वाल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी वेबसाइट पर रामलीला मैदान में आंदोलन की तैयारियों पर खास रिपोर्ट प्रकाशित की है। रिपोर्ट में रामलीला और रावण वध का जिक्र करते हुए भ्रष्टाचार को रावण के रूप में बाताया गया है।
ब्रिटेन की प्रतिष्ठित समाचार संस्था बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में बाबा के आंदोलन पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए सवाल किया है कि बाबा का अनशन किसी नेक मकसद के लिए है या फिर सरकार को ब्लैकमेल करने के लिए? ब्रिटेन के अखबार द टेलीग्राफ ने अपनी रिपोर्ट में आजादी के बाद से भ्रष्टाचार मिटाने के प्रयासों की नाकामी का जिक्र करते हुए लिखा है कि अब योग और भूख हड़ताल के जरिए भ्रष्टाचार विरोधियों ने देश को हिला दिया है।इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूं तो भारत की संसद में एक भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी बनाने के लिए प्रयास १९६८ में ही शुरु हो गए थे लेकिन अभी तक इसका गठन नहीं हो सका है। भ्रष्टाचार मिटाने की अब तक की नाकामयाबियों ने अब भारत में एक महान आंदोलन को प्रेरित किया है। आंदोलन शुरु हो चुका है और सरकार में बैचेनी बढ़ गई है।
मलेशिया के अखबार द स्टार की वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत में एक योग गुरु अपने लाखों समर्थकों के साथ आंदोलन कर रहे हैं और उनका उद्देश्य सिर्फ एक है- भारत से भ्रष्टाचार का खात्मा।
खाड़ी देशों की प्रमुख न्यूज वेबसाइट गल्फ न्यूज ने लिखा है कि कांग्रेस ने बाबा रामदेव के अनशन को रोकने में पूरी ताकत झोंक दी है। अमेरिका के प्रमुख मीडिया संस्थान वॉयस ऑफ अमेरिका ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय योगगुरु ने एक देश की जड़ों में व्याप्त भ्रष्टाचार को मिटाने का बीड़ा उठाया है। हालांकि सरकार की ओर से पूरी कोशिशें की जा रही हैं कि बाबा के आंदोलन को रोक दिया जाए। sabhaar -bhaskar.com
आतंकियों से सेना के संबंध का वीडियो दिखा अमेरिका ने पाकिस्तान को लताड़ा

वाशिंगटन/इस्लामाबाद। अमरीका ने पाकिस्तानी सैन्य अफसरों और आईएसआई के आतंकियों से सांठगांठ के सबूत पेश करते हुए पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई है। ऎसे में लादेन की मौत के बाद पहले से ही तनाव में चल रहे अमरीका-पाक रिश्तों में और दरार आने की आशंका है।
पाकिस्तान की यात्रा पर गए अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए के चीफ लियोन पनेटा ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल कयानी से मुलाकात के दौरान इस बात के सबूत दिए कि पाकिस्तान सुरक्षाबलों, सेना और आईएसआई के वहां सक्रिय कई आतंकी संगठनों से सांठगांठ है। कयानी को सबूत दिखाते हुए पनेटा ने कहा, सेटेलाइट और अन्य इंटेलिजेंस से प्राप्त सूचना के आधार पर सीआईए यह मानती है कि पाकिस्तानी सुरक्षाबल आतंकियों की मदद करने में लगे हैं। अमरीका ने पाकिस्तान को आतंकियों की मदद करने के लिए कड़ी फटकार भी लगाई है।
पनेटा ने कयानी को 10 मिनट का एक वीडियो दिखाया जिसके अनुसार आतंकी दक्षिणी वजीरिस्तान और मिरानशाह बेस पर बम बनाने की फैक्ट्रियां संचालित कर रहे हैं। इनमें से एक संगठन हाफिज गुल बब्बर और दूसरा हक्कानी संगठन का है। दोनों गुटों के खिलाफ अमरीकी और नाटो सेना अभियान छेड़े हुए है। लेकिन सीआईए को शक है कि पाकिस्तानी आर्मी दोनों आतंकियों से गुपचुप डील कर रही है।
उन्होंने बताया कि अमेरिका ने पाकिस्तान को इन दोनों स्थानों की जानकारी दी थी, लेकिन जब पाकिस्तानी सुरक्षा बल वहां पहुंचीं, तो पता चला कि आतंकवादी वहां से फरार हो गए हैं। पनेटा ने पाशा को और भी कई सबूत दिए, जिससे यह साबित होता है कि सेना और आईएसआई के आतंकवादियों से संबंध हैं।
पाकिस्तान में अमेरिकी कमांडो द्वारा अल कायदा चीफ ओसामा बिन लादेन को मारे जाने के बाद दोनों देशों में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका ने पाकिस्तान से आतंकवादियों पर प्रभावी कार्रवाई करने को कहा। अमेरिका ने पाकिस्तान को पांच कुख्यात आतंकवादियों की सूची भी दी है और कहा है कि या तो इन्हें गिरफ्तार किया जाए, या फिर खत्म कर दिया जाए। इन आतंकवादियों में आयमन जवाहरी का भी नाम है। सूची में इलियास कश्मीरी का भी नाम है, जिसकी मौत पर संदेह बरकरार है।
पाकिस्तान ने माना है कि इन मामलों में आतंकवादियों को पूर्व में ही सूचना दी गई है और कहीं न कहीं, पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों में से कुछ लोग इसमें शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच हो रही है और जो भी इसमें शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि हम पाकिस्तान को सूचनाएं देने को तैयार हैं, लेकिन वह यह साबित तो करे कि कार्रवाई होगी। सुरक्षा बलों के जवान ही सरकार के नियंत्रण में नहीं हैं। sabhaar - bhaskar.com
भारत पर 'हमला' करने चीन ने बनाई एयर बेस !!

बीजिंग. दुनिया भर में अपनी ताकत को फैलाने को बेताब चीन ने भारत को निशाने पर रखते हुए पांच नई एयर बेस तैयार कर ली हैं। तिब्बत के इलाके में बनाई गई यह एयर बेस चीन को भारत पर हमला करने की स्थिति में खासी मदद करेंगी।
कैसे हुआ खुलासा
भारत के रक्षा मंत्री ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया है कि तिब्बत के स्वायत्तक्षेत्र में चीन द्वारा निर्माण कार्य कराया गया है।
सडकें, रेल और अब एयर बेस
भारत से सटे इलाके में चीन पहले से ही विकास के काम को खासी गती से करता आया है। खबर है कि चीन ने वर्ष 2010 में 58,000 किलोमीटर स़डकें बनवाई हैं और गोंगार, पनगता, लिंची, होपिंग तथा गर गुंसा में पांच हवाईक्षेत्र बनवाए हैं।
भारत के लिए बड़ा ख़तरा
इन पांच एयर बेस पर चीन रूस निर्मित अति आधुनिक सुखोई -27यूबीके लड़ाकू विमान तैनात करेगा साथ ही बाकी की कसार सुखोई 30 एमकेके लड़ाकू विमान पूरी कर देंगे। चीन द्वारा भारत से लगती सीमा पर इस तरह लड़ाकू विमान की बेस बनाने का मकसद भारत के खिलाफ भविष्य में सैनिक घेराबंदी करना भी हो सकता है।
sabhaar bhaskar .com
आपकी राय
चीन द्वारा एक के बाद एक की जा रही फौजी तैयारियां भारत के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है हमें बताएं....लिख भेजें हमें अपने विचार और बताएं कि भारत को चीन की चुनौती से कैसे निपटना चाहिए...
और ऐसे सिमट गया भारत

प्राचीन भारत की सीमाएं विश्व में दूर-दूर तक फैली हुई थीं। भारत ने राजनैतिक आक्रमण तो कहीं नहीं किए परंतु सांस्कृतिक दिग्विजय अभियान के लिए भारतीय मनीषी विश्वभर में गए। शायद इसीलिए भारतीय संस्कृति और सभ्यता के चिन्ह विश्व के लगभग सभी देशों में मिलते हैं।
यह एक ऐतिहासिक सत्य है कि सांस्कृतिक और राजनैतिक रूप से भारत का विस्तार ईरान से लेकर बर्मा तक रहा था। भारत ने संभवत विश्व में सबसे अधिक सांस्कृतिक और राजनैतिक आक्रमणों का सामना किया है। इन आक्रमणों के बावजूद भारतीय संस्कृति आज भी मौजूद है। लेकिन इन आक्रमणों के कारण भारत की सीमाएं सिकुड़ती गईं। सीमाओं के इस संकुचन का संक्षिप्त इतिहास यहां प्रस्तुत है।
ईरान – ईरान में आर्य संस्कृति का उद्भव 2000 ई. पू. उस वक्त हुआ जब ब्लूचिस्तान के मार्ग से आर्य ईरान पहुंचे और अपनी सभ्यता व संस्कृति का प्रचार वहां किया। उन्हीं के नाम पर इस देश का नाम आर्याना पड़ा। 644 ई. में अरबों ने ईरान पर आक्रमण कर उसे जीत लिया।
कम्बोडिया – प्रथम शताब्दी में कौंडिन्य नामक एक ब्राह्मण ने हिन्दचीन में हिन्दू राज्य की स्थापना की।
वियतनाम – वियतनाम का पुराना नाम चम्पा था। दूसरी शताब्दी में स्थापित चम्पा भारतीय संस्कृति का प्रमुख केंद्र था। यहां के चम लोगों ने भारतीय धर्म, भाषा, सभ्यता ग्रहण की थी। 1825 में चम्पा के महान हिन्दू राज्य का अन्त हुआ।
मलेशिया – प्रथम शताब्दी में साहसी भारतीयों ने मलेशिया पहुंचकर वहां के निवासियों को भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति से परिचित करवाया। कालान्तर में मलेशिया में शैव, वैष्णव तथा बौद्ध धर्म का प्रचलन हो गया। 1948 में अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हो यह सम्प्रभुता सम्पन्न राज्य बना।
इण्डोनेशिया – इण्डोनिशिया किसी समय में भारत का एक सम्पन्न राज्य था। आज इण्डोनेशिया में बाली द्वीप को छोड़कर शेष सभी द्वीपों पर मुसलमान बहुसंख्यक हैं। फिर भी हिन्दू देवी-देवताओं से यहां का जनमानस आज भी परंपराओं के माधयम से जुड़ा है।
फिलीपींस – फिलीपींस में किसी समय भारतीय संस्कृति का पूर्ण प्रभाव था पर 15वीं शताब्दी में मुसलमानों ने आक्रमण कर वहां आधिपत्य जमा लिया। आज भी फिलीपींस में कुछ हिन्दू रीति-रिवाज प्रचलित हैं।
अफगानिस्तान – अफगानिस्तान 350 इ.पू. तक भारत का एक अंग था। सातवीं शताब्दी में इस्लाम के आगमन के बाद अफगानिस्तान धीरे-धीरे राजनीतिक और बाद में सांस्कृतिक रूप से भारत से अलग हो गया।
नेपाल – विश्व का एक मात्र हिन्दू राज्य है, जिसका एकीकरण गोरखा राजा ने 1769 ई. में किया था। पूर्व में यह प्राय: भारतीय राज्यों का ही अंग रहा।
भूटान – प्राचीन काल में भूटान भद्र देश के नाम से जाना जाता था। 8 अगस्त 1949 में भारत-भूटान संधि हुई जिससे स्वतंत्र प्रभुता सम्पन्न भूटान की पहचान बनी।
तिब्बत – तिब्बत का उल्लेख हमारे ग्रन्थों में त्रिविष्टप के नाम से आता है। यहां बौद्ध धर्म का प्रचार चौथी शताब्दी में शुरू हुआ। तिब्बत प्राचीन भारत के सांस्कृतिक प्रभाव क्षेत्र में था। भारतीय शासकों की अदूरदर्शिता के कारण चीन ने 1957 में तिब्बत पर कब्जा कर लिया।
श्रीलंका – श्रीलंका का प्राचीन नाम ताम्रपर्णी था। श्रीलंका भारत का प्रमुख अंग था। 1505 में पुर्तगाली, 1606 में डच और 1795 में अंग्रेजों ने लंका
पर अधिकार किया। 1935 ई. में अंग्रेजों ने लंका को भारत से अलग कर दिया।
म्यांमार (बर्मा) – अराकान की अनुश्रुतियों के अनुसार यहां का प्रथम राजा वाराणसी का एक राजकुमार था। 1852 में अंग्रेजों का बर्मा पर अधिकार हो गया। 1937 में भारत से इसे अलग कर दिया गया।
पाकिस्तान - 15 अगस्त, 1947 के पहले पाकिस्तान भारत का एक अंग था।
बांग्लादेश – बांग्लादेश भी 15 अगस्त 1947 के पहले भारत का अंग था। देश विभाजन के बाद पूर्वी पाकिस्तान के रूप में यह भारत से अलग हो गया। 1971 में यह पाकिस्तान से भी अलग हो गया।
दिग्गी का दिमाग खराब, पागलखाने भेज देना चाहिए
वयोवृद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हजारे ने कांग्रेसी नेता दिग्विजयसिंह द्वारा उन्हें आरएसएस का सदस्य बताये जाने की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह का बयान देने वाले व्यक्ति को पागलखाने भेज देना चाहिए।हजारे ने कहा कि सिंह ने एक बार उनके पीछे भारत माता की तस्वीर देख ली थी और केवल इसी आधार पर दावा कर दिया कि वह आरएसएस के सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी करने वाले सिंह को इलाज के लिए पागलखाने bhej देना चाहिए1
उन्होंने कहा कि मैं केवल भारतीय हूं और किसी भी राजनीतिक दल से मेरा कोई ताल्लुक नहीं है।
हजारे ने विदेशों में जमा काले धन को देश में वापस लाने की मांग को लेकर अनशन कर रहे योग गुरु स्वामी रामदेव की हालत पर चिंता जताते हुए कहा कि उन्हें जल्द ही अनशन समाप्त कर देना चाहिए। साभार -वेब दुनिया
सोमवार, 6 जून 2011
रविवार, 5 जून 2011
कांप उठी मेरी आत्मा: बाबा रामदेव

नई दिल्ली बाबा रामदेव ने हरिद्वार में अपने मुख्यालय पतंजलि आश्रम में आज एक पत्रकार वार्ता में कहा कि शनिवार और रविवार की रात उनके जीवन की काली रात थी। रामलीला मैदान पर उनकी हत्या की साजिश रची गई थी और यहां तक कि पुलिस ने एक बार उनके गले में फंदा भी डाल दिया था। उन्होंने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी पर सीधा निशाना साधा और कहा कि पूरी कार्रवाई उन्हीं के निर्देश पर हुई है। बाबा ने कहा कि यदि उनकी जान को कुछ होता है तो इसके लिए पूरी तरह से कांग्रेस और सोनिया गांधी जिम्मेदार होंगे। उन्होंने कहा कि आज का दिन वे काला दिवस के रूप में मना रहे हैं और रामलीला मैदान से शुरु हुआ, उनका अनशन जारी रहेगा। वे आज दिल्ली से विशेष विमान से देहरादून पहुंचे और वहां से वे हरिद्वार स्थित अपने पतंजलि आश्रम पहुंचे। वे पूरी तरह सफेद कपड़ों में हैं। बाबा रामदेव ने हरिद्वार में अपनी पत्रकार वार्ता में कहा कि उस काली रात की याद रौंगटे खड़े करने वाली है। उन्होंने कहा कि अब तक उन्होंने लोगों पर हुए पुलिसिया अत्याचार को सिर्फ सुना था। लेकिन जो रामलीला मैदान में लोगों पर पुलिस का अत्याचार हुआ उसने बर्बरता की सारी हदें पार कर दी। उन्होंने बताया कि उन्होंने बार-बार पुलिस को मना किया कि वे महिलाओं के साथ इस तरह का व्यवहार न करें, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने महिलाओं और बच्चों को भी नहीं बख्शा। महिला पुलिस पांच-दस की संख्या में होगी और सशस्त्र पुलिस करीब पांच से दस हजार के बीच थे। महिलाओं और बच्चों पर पुलिस के अत्याचार का वाकया सुनाते हुए बाबा रो पड़े। उन्होंने कहा कि उनकी आंखों के सामने जो उन्होंने जुल्म किए उसकी कोई तुलना ही नहीं है। यह इतिहास की सबसे क्रूर घटना थी। पुलिस ने छोटे-छोटे बच्चों को भी नहीं बख्शा। बाबा ने आरोप लगाया कि बच्चों को घसीट-घसीट कर मारा गया। उन्होंने कहा कि यह सब देखकर उनकी आत्मा कांप उठी। उन्होंने सरकार के मंत्रियों के साथ हुई बातचीत का ब्योरा देते हुए कहा कि सरकार की मंशा पहले दिन से ही साफ नहीं थी और षडयंत्र रचे रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया कि आप जो चाहते हैं वह पूरा किया जाएगा। सरकार काले धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने और उसके लिए बिल लाने को भी तैयार थी। सरकार काले धन का पता लगाने के लिए उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाने पर भी राजी थी, लेकिन वे लगातार अनशन समाप्त करने, दबाव डाल रहे थे। लेकिन हमारी मांग लिखित में आश्वासन दिए जाने की थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें कहा कि चार मंत्री एयरपोर्ट जाकर आपसे मिले उससे सरकार की काफी आलोचना हुई है और अब उन्हें आंदोलन वापस ले लेना चाहिए। होटल में हुई बैठक का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि यह करीब पांच घंटे तक चली जिसमें उन्हें साफ धमकी दी गई कि या तो समझौता करो, या फिर सरकार की नाराजगी झेलो। उन्होंने कहा कि कपिल सिब्बल जैसे व्यक्ति ने पूरी शातिरता से उनसे बातचीत की। बाबा ने आरोप लगाया कि उनकी योजना गिरफ्तार करके या फिर एनकाउंटर करवाने की थी। उन्होंने कहा कि सारा मीडिया इस बात को जानता है कि जैसे चार तारीख की रात को भारी पुलिस आई थी उसी तरह तीन तारीख को भी होटल के बाहर भारी पुलिस थी। सरकार तो पहले दिन से ही सभी लोगों की जान लेने पर तुली थी और यदि उस दिन उनके कार्यकर्ता सतर्क नहीं होते, तो वहां कई लाशें बिछ डातीं। स्वामी जी ने माना कि महिलाओं के कपड़े पहन कर उन्होंने पुलिस से बचने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि सरकार की पूरी योजना थी कि या तो रामदेव को इस दमन के दौरान मरवा दिया जाए या फिर उसे गायब करवा दिया जाए। उन्होंने महिला के वस्त्र पहनकर वहां से निकलने की कोशिश की। वे दो घंटे तक एक दीवार के साथ चिपक कर खड़े रहे। जब आंसू गैस के गोलों का प्रभाव थोड़ा कम हुआ तब वे वहां से निकले। उन्होंने माना कि वे महिलाओं के बीच में छुप हुए थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरी स्थिति को भांप लिया था और उन्हें पूरी आशंका थी कि यह उनको मारने की योजना है। उन्होंने कहा कि उन्हें मरने से डर नहीं लगता लेकिन कायरता से मरना बहादुरी नहीं है। उन्होंने दोहराया कि सरकार रिमोट से संचालित हो रही है। उन्होंने कहा कि पहले यह लगता था कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इस देश में पैदा नहीं हुईं फिर भी देश की बहू हैं। लेकिन कल रात उनके आदेश पर जो हुआ उससे यह साफ हो गया कि सोनिया गांधी को देश के नागरिकों से प्यार नहीं है। राष्ट्रभक्त संन्यासियों को हत्यारा और आतंकी कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। मेरे गले में दुपट्टा था और उन्होंने उससे मेरे गले में फंदा लगाकर मारने की कोशिश हुई। उन्होंने कहा कि क्या अन्याय के खिलाफ आवाज उठाकर वे अपराधी हो गया।
ऐसा जुल्म तो अंग्रेजों ने भी नहीं किया था

नई दिल्ली. रामलीला मैदान पर देर रात पुलिस ने अनशन पर बैठे बाबा रामदेव को हिरासत में ले लिया है और उनकों सुरक्षित स्थान पर बाहर ले गई है। लेकिन बाबा को हिरासत में लेने के लिए पुलिस को बाबा के सर्मथकों का विरोध प्रदर्शन का सामना भी करना पड़ा है लेकिन पुलिस ने आंसू के गोले तक इस्तेमाल कर बाबा सर्मथकों को तितर-बितर कर बाबा को चारों तरफ से घेरकर अपनी हिरासत में ले लिया। पूरे दो घंटे तक पुलिस ने बाबा को हिरासत में लेने के लिए हर संभव प्रयास किया। इस दौरान बाबा को पुलिस से बचाने के लिए सर्मथकों ने अपना सुरक्षा घेरा बनाकर बाबा को कंधे पर उठा लिया था, कभी बाबा मंच पर आकर अपनी बात कहना चाहते थे, इस दौरान बाबा ने इस बात के संकेत भी दिए कि अगर उनको हिरासत में लेना है तो सरकार दिन में वारंट दे और दिन में हिरासत में ले। यूं चोरों की तरह रात में हिरासत में लेने का प्रयास ना करें। लेकिन दिल्ली पुलिस ने बाबा की बात को अनसुनी कर ना केवल बाबा रामदेव को अपनी हिरासत में लिया बल्कि उनके सर्मथकों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े।हिरासत में लिए जाने से पहले क्या बोले बाबा रामदेव एक नजर : आजाद भारत का सबसे बड़ा जुल्म दिल्ली पुलिस ने मुझे हिरासत में लेने के लिए जो व्यवहार दिल्ली के रामलीला मैदान पर किया है वैसा जुल्म तो अंग्रेजों ने भी नहीं किया था। आजाद भारत का यह सबसे बड़ा जुल्म है। हमने कोई अपराध नहीं किया है तो फिर क्यों इस तरह का व्यवहार हमारे साथ किया जा रहा है। पीएम से अनुरोध बाबा रामदेव ने मंच से दिए जा रहे भाषण में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से अनुरोध करते हुए कहा कि अगर सरकार मुझे हिरासत में लेना चाहती है तो दिन में वारंट दे और मुझे हिरासत में ले , लेकिन यूं रात को इस तरह बिना कोई सूचना दिए हिरासत में लेने का प्रयास ना करें , यह हमें मंजूर नहीं है। देश की जनता कड़ा विरोध करे, हमें आपका समर्थन चाहिए पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ मैं पूरे देश की जनता से अनुरोध करता हूं कि वे कड़ा विरोध प्रदर्शन करें और लोग घर से निकलकर आएं और आवाज बुलंद करें। धन लूटा तो लूटा, अंग्रेजों जैसा व्यवहार क्यों ये कैसा लोकतंत्र है जहां इस तरह अनशन पर बैठे लोगों के साथ पुलिस अंग्रेजों जैसा व्यवहार करती है। धन लूटा तो लूटा, अब अंग्रेजों जैसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है। बाबा को हिरासत में लिए जाने का घटनाक्रम देर रात 11 बजे : ज्वाइंट कमिश्नर आए और स्थिति का मुआयना किया रात 12 बजे सादी वर्दी में पुलिस बल का रामलीला मैदान में प्रवेश, चारों तरफ पुलिस फैली रात एक बजे के आसपास दिल्ली पुलिस और आरपीएफ के जवान वर्दी में नजर आए और देखते ही देखते इनकी संख्या बढ़ने लगी रात 1.30 बजे बाबा को पुलिस हिरासत में लेने का दबाव बनाया गया लेकिन बाबा ने गिरफ्तारी देने से इंकार किया, भक्तों ने सुरक्षा घेरा बनाकर अपने कंधे पर बैठाया रात 1.40 बाबा भक्तों के बीच उनके कंधे पर बैठकर संबोधित करते हैं, इस दौरान चारों तरफ पुलिस का घेरा बढ़ता जा रहा है रात 2 बजे के आसपास बाबा कुछ समर्थकों के साथ मंच पर आए, घटनाक्रम से हतप्रभ बाबा परेशान दिखे, सरकार को संकेत दिया यू रात को इस तरह हिरासत में लेने का प्रयास ना करें, बाबा के चारों तरफ सर्मथकों , महिलाओं ने भी घेरा बनाया ताकि पुलिस बाबा तक पहुंच ना पाए, इस दौरान बाबा सर्मथक लोगों ने पुलिस पर पत्थर चलाना शुरू किया। रात 2.15 बजे दिल्ली पुलिस ने आंसू गैस के गोलों का प्रयोग किया, आंसू गैस के चलते बाबा के मंच पर आग लगी, कुछ ही देर में मंच लगभग खाली होता दिखा, रामलीला मैदान में देखते ही देखते अफरा तफरी का माहौल रात 2.30 रामलीला मैदान पर बाबा का मंच नष्ट हो गया, बाबा को लेकर संशय की स्थिति कि आखिर बाबा हैं कहा, बाबा को हिरासत में लिए जाने का समाचार फैला सुबह दिल्ली पुलिस का दावा बाबा को हिरासत में नहीं लिया गया वे खुद कहीं चले गए जबकि बाबा के संगठन भारत स्वाभिमान ट्रस्ट का दावा किया कि बाबा को हिरासत में लिया गया, सुबह इस तरह की सूचना आ रहीं है कि बाबा को उत्तराखंड राज्य की सीमा के पास पुलिस ने छोड़ा कई लोग घायल बाबा रामदेव को हिरासत में लेने की जो कार्रवाई देर रात पुलिस ने की इसमें कई लोगों के घायल होने की सूचना है। बाबा का पीए के भी पैर में फ्रैक्चर आने की सूचना है।
पुलिस द्वारा जालियावाला बाग की तरह कार्यवाही

योग ऋषि रामदेवजी के समर्थको पर बर्बरतापूर्वक कार्यवाही कर पुलिस स्वामी रामदेवजी को किसी अज्ञात स्थान पर ले गई है । इसी प्रकार आचार्य बालकृष्ण को भी बलपूर्वक गिरफ्तार कर अज्ञात स्थल पर ले जाया गया है समर्थको के अनुसार स्वामीजी की जान को खतरा है । भगदड मे अनेको महिला व बुजुर्ग घायल हो गए उन्हे अस्पताल मे भर्ती किया गया है । मिडिया को भी कवरेज करने की से रोका जा रहा है । पुलिस ने लाठीचार्ज व आँसू गैस का उपयोग कर लोगो को से रामलीला मैदान खाली करवाया । स्वामीजी ने गिरफ्तार होने से पहले अपने समर्थको से संयमित तरीके से इस घटना का विरोध करने का निर्देश दिया है । लोगो का समान बिखर गया है लोग आपस मे बिछड़ गए है व दिल्ली मे यहाँ -वहाँ भटक रहे है । शांतिपूर्वक सत्याग्रह कर रहे लोगो पर अचानक हमला कर स्वतंत्र देश मे अंगरेजों की तरह कार्यवाही की गई । स्वामी रामदेवजी को दिल्ली के बाहर कही छोड़ा गया है । गंभीर रूप से घायल लोगो को पुलिस अन्य स्थानो पर ले गई है । मीडिया, विभिन्न सामाजिक संगठनो व स्वामीजी के समर्थको ने सरकार की इस कार्यवाही का कढ़े शब्दो मे निंदा की है । देर से प्राप्त जानकारी के अनुसार सत्याग्रह शांतिपूर्वक जारी रहेगा । राष्ट्रहित में तीन माँगे (इन मांगो की वजह से ये कार्यवाही हुई ) • लगभग चार सौ लाख करोड़ रुपये का काला धन जो की राष्ट्रीय संपत्ति है यह देश को मिलना चाहिए । • सक्षम लोकपाल का कठोर कानून बनाकर भ्रष्टाचार पर पूर्ण अंकुश लगाना । • स्वतंत्र भारत में चल रहा विदेशी तंत्र (ब्रिटिश रूल ) खत्म होना चाहिए जिससे कि सबको आर्थिक व सामाजिक न्याय मिले
सोमवार, 4 अप्रैल 2011
मंगलवार, 8 मार्च 2011
रविवार, 6 मार्च 2011
शुक्रवार, 4 मार्च 2011
सोमवार, 24 जनवरी 2011
रविवार, 23 जनवरी 2011
भारत और india में फर्क

-विजय आनन्द
बुद्ध और महावीर का भारत, अशोक , चन्द्रगुप्त का भारत, सूर और तुलसी का भारत, महाराणा प्रताप, शिवाजी, लक्ष्मीबाई, महात्मा गांधी, रविन्द्रनाथ टैगोर, सरदार पटेल का प्यारा ‘भारत’ इंडिया बन कर लोगों को भरमा रहा है। कभी सोने की चिड़िया कहलाने वाला यह आर्यावर्त भारत के नाम से जाना जाता रहा है। लोग आते रहे, जाते रहे, राजवंश बदलते रहे, किन्तु आर्यावर्त भारत का नाम नहीं बदला।
हमारे देश में कई उतार-चढ़ाव आये, पर भारत-भारत ही बना रहा। तुगलकों और मुगलों के शासनकाल में भी यह भूभाग भारतवर्ष के नाम से रोशन रहा। ‘भारतवर्ष’ नाम ही अपने आप में महिमापूर्ण एवं गौरवशाली है। भारत अर्थात भक्तिभाव में लीन, (भा-भक्ति, रत-लीन) हमारी मूल भावना भी शुभ एवं पवित्र रही है- ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘सर्वेभवन्तु सुखिन:, सर्वेसन्तु निरामया:। सर्वे भ्रद्राणि पश्यन्तु, माकश्चित् दु:खभाग् भवेत।’ अर्थात सभी प्रसन्न रहें, सभी निरोग रहें और सबका भला हो, शुभ हो, कोई भी दुख का भागी, व्याधिग्रस्त और अभावग्रस्त न हो।मूलत: भारत आर्यावर्त है, और इसकी मिलीजुली संस्कृति निर्विवाद रूप से हजारों वर्ष पुरानी है। सभी भारतवासी आर्यपुत्र हैं, फिर चाहे वे किसी भी धर्म के हों।
दुर्भाग्यवश भारतवर्ष पर जब ब्रिटेन का कब्जा हुआ तो यहां पर सब कुछ पश्चिमी रंग-ढंग का हो गया। अंग्रेजों ने ‘भारत’ को इंडिया कहना शुरु कर दिया। जबकि भारत को भारत कहने में उच्चारण संबंधी कोई कठिनाई नहीं थी। आज विडम्बना यह है कि हम बडे गर्व से अंग्रेजी संस्कृति को अपनाए हुए हैं। देश में अब भी बहुत कुछ अंग्रेजी ढर्रे पर ही चल रहा है, बिना जांचे-परखे कि यह हमारे देश की परिस्थिति के अनुकूल है या नहीं। भारतवर्ष का नाम इंडिया (INDIA) करना अनावश्यक था। रोमन में BHARAT बिना किसी कठिनाई के लिखा और पढ़ा जा सकता है, किन्तु ऐसा प्रतीत होता है कि भारत के नैतिक मूल्यों, गरिमा, आन-बान और शान को देखकर द्वेषवश इसका मूल नाम तिरस्कृत किया गया। शब्दकोश में (indi) वाले शब्दों पर गौर करें तो अधिकतर शब्द नकारात्मक प्रवृत्ति और दयनीय अवस्था को दर्शाते हैं। ऐसा निम्न शब्दों से सहज अनुमान लगाया जा सकता है:
INDICT – इंडिक्ट- अभियोग लगाना
INDIFFERENT- इंडिपफरेंट- उदासीन
INDIGENCE- इंडिजेंस- गरीबी
INDIGENT- इंडिजेंट- गरीब, असहाय
INDIGETION -इंडाइजेशन- अपच
INDIGNITY -इंडिग्निटी- तिरस्कार
INDISCERNIBLE - इंडिसर्निबल- धुंधला
INDISCREET -इंडिस्क्रीट- नासमझीभरा
INDISCRIMINATELY - इंडिस्क्रिमनेटली-अविवेकपूर्ण
INDISPOSED -इंडिस्पोज्ड- अस्वस्थ
INDISPOSITION -इंडिस्पोजिशन- अस्वस्थता
INDISTINCT - इंडिस्टिंक्ट- धुंधला
INDIGNANT - इंडिग्नेंट – रोषपूर्ण
उपरोक्त शब्दों में प्रथम चार अक्षर INDI हैं और अंत में बस A लगाकर इंडिया शब्द बन गया। ‘इंडिया’ शब्द कहने में ही बड़ा अटपटा लगता है। संसार के लगभग सभी देशों के नाम रोमन में ही हैं, जो मूल नाम हैं, जैसे: जापान (JAPAN), अमेरिका (AMERICA), फ्रांस (FRANCE), पाकिस्तान(PAKISTAN), नेपाल(NEPAL) वहीं भारत का नाम बदलकर इंडिया किया गया, और हम सभी भारतवासी बिना किसी विरोध के खुशी से यही नाम अपनाए हुए हैं- इंडिया की बजाय BHARAT कहना-सुनना ज्यादा कर्णप्रिय लगता है। ‘भारत’ कहने से दिल में श्रद्धा और अदब का भाव उत्पन्न होता है। शायद इसीलिए पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी ने कहा था ‘मेरा भारत महान’। भारत शब्द ही इस देश की प्राचीन परंपरा, संस्कृति और शुभ भावनाओं के अनुकूल है।
आज समय की जरूरत है कि हम सब भारतवासी अपने देश का नाम पुन: विश्व में ‘भारत’ के रुप में स्थापित एवं प्रतिष्ठित करें। हम सब की निर्विवाद रुप से यही प्राथमिकता होनी चाहिये। इसके लिए घर-घर अलख जगानी होगी और जन जागरण अभियान चलाने होंगे। मीडिया की इसमें सशक्त एवं प्रभावशाली भूमिका हो सकती है। संसद में इस आशय का प्रस्ताव एकमत से ध्वनित एवं पारित होना चाहिए। संसार के प्रत्येक देश में इंडिया की जगह ‘भारतवर्ष’ नाम दर्ज हो, जिससे ‘भारतवर्ष’ की प्राचीन परमपरा और संस्कृति की भीनी-भीनी खुशबू महकती रहे।
”जियें तो सदा उसी के लिए, यही अभियान रहे, यही हर्ष,
निछावर करदें हम सर्वस्व उसी पर, हमारा प्यारा भारतवर्ष”
पुस्तक समीक्षा : राष्ट्रवादी कविता

-हेमा पाण्डेय
कवि लक्ष्मी नारायण ‘भाला’ चूंकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं इसलिए उनके इस कविता संग्रह ‘भारत में भारत हो’ में राष्ट्रवाद नजर आये तो किसी को अचरज कैसा। भाला की काव्य शैली कि यह विशेषता है कि बिम्ब उकेरने में उन्हें सटीक शब्द की शायद ही खोज-बीन करनी पड़ती है।
प्रस्तुत कविता संग्रह में उन्होंने विभिन्न विषयों को कलमबद्ध किया है। कहीं वो भारतमाता का गुणगान करते हुए दिखते हैं तो कहीं वो देश के युवा को आंदोलित करते हुए नजर आते हैं। इस संग्रह की कविताओं की यह खासियत है कि ये कविता कम और गीत ज्यादा लगती हैं। पाठक इन्हें लोकल ट्रेन की तरह रुक रुक कर नहीं पढ़ता बल्कि राजधानी या शताब्दी एक्सप्रेस की तरह गति के साथ पढ़ता ही चला जाता है। इस उदाहरण से बात सिद्ध हो जाएगी-
‘छोटे छोटे हाथ जोड़कर
अपना शीश झुकाते हैं।
तुतली बोली में भालत मां
तेले गीत गाते हैं।’
ऐसा नहीं है कि लक्ष्मी नारायण भाला ने केवल वैसी ही कविताएं लिखी हैं जो उनके सार्वजनिक जीवन को व्यक्त करती हैं। इस संग्रह में पाठकों को वो कविताएं भी मिलेंगी जिनसे कवि के व्यक्तिगत जीवन की झलक मिलती है। जैसे ‘अनपढ़ा पृष्ठ’ शीर्षक की कविता की ये पंक्तियां-
जीवन की खुली किताब को/ पढ़ते पढ़ाते/ एक पृष्ठ पर/ रुक जाती हैं आंखें/ उस धरातल पर/ जो कहीं सपाट है, कहीं लचीला/ कहीं मुलायम तो कहीं पथरीला।
राष्ट्रवादी लोगों के लिए यह कविता संग्रह अपने पुस्तकालय में संग्रह करने लायक है।
पुस्तक : भारत में भारत हो
कवि : लक्ष्मीनारायण ‘भाला’
प्रकाशक : स्वदेशी प्रेस, शाहदरा, दिल्ली
मूल्य : 150 रुपये
पृष्ठ : 132
शुक्रवार, 21 जनवरी 2011
चीन पर कसता सेना का शिकंजा
रणनीतिक मामलों की प्रमुख वेबसाइट स्ट्रेटफोर ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में चीन के सम्बन्ध में कुछ चौंकाने वाले तथ्यों का रहस्योद्घाटन किया है। इस वेबसाइट के अनुसार चीन में जैसे जैसे वर्ष 2012 में नेतृत्व की पीढी के बदलाव का समय निकट आ रहा है उसी अनुपात में चीन में सेना और सरकार के मध्य विरोधाभास और आन्तरिक तनाव के चिन्ह भी दिखने आरम्भ हो गये हैं।
वेबसाइट ने पिछले दिनों चीन की यात्रा पर गये अमेरिकी रक्षा मंत्री राबर्ट गेट्स की यात्रा के दौरान चीन द्वारा जे 20 की आधुनिक लडाकू विमान के परीक्षण की जानकारी चीनी राष्ट्रपति हू जिंटाओ को नहीं थी इससे सम्बन्धित गेट्स के प्रश्न पर चीन के राष्ट्रपति हू जिन्टाओ बुरी तरह चौंक गये जिसके आधार पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इस परीक्षण के लिये राबर्ट गेट्स की यात्रा के समय का चयन करते समय चीन की सेना ने सरकार से अनुमति या विचार विमर्श नहीं किया था।
वेबसाइट के अनुसार चीन के नेता माओ और देंग स्वयं सैनिक भी थे इस कारण सैन्य नीतियों और प्राथमिकताओं पर उनकी पकड थी परन्तु आज का नेतृत्व सेना के प्रशिक्षण से नहीं गुजरा है इस कारण चीन की सेना उनकी इस अनुभवहीनता का लाभ उठाकर विदेश नीति और अन्य नीतियों में अपना प्रभाव स्थापित करने में सफल हो रही है। वर्ष 2012 के बाद इस प्रक्रिया में और तीव्रता आ सकती है।
स्ट्रेटफोर के अनुमान के अनुसार चीन की अर्थव्यवस्था का बुलबुला बहुत शीघ्र ही फूटने वाला है और इसकी स्थिति भी जापान, दक्षिण कोरिया , थाइलैंड और अन्य एशिया के उन देशों की भाँति हो सकती है जो तेजी से विकास दर और आर्थिक विकास के बाद संकट के दौर से गुजरे। अनुमान के अनुसार चीन में इस स्थिति में प्रांतीय विभाजन और आंतरिक टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसके साथ ही पिछले एक दशक में चीन में सेना के बढते हस्तक्षेप से इसकी सामरिक मह्त्वाकाँक्षा को लेकर अनेक देश इससे सतर्क होने लगे हैं। इस कारण चीन की सेना अब अपनी सामुद्रिक और वायुमार्ग की सैन्य क्षमता अन्य देशों से कई गुना अधिक करने में जुटी है।
वेबसाइट के ताजा अनुमान के अनुसार एक ओर चीन की आर्थिक स्थिति के अधिकतम बिंदु पर पहुँच जाने के बाद आने वाले ठहराव और उससे निपटने का संकट, पिछले कुछ वर्षों में इसके सैन्य प्रदर्शन को लेकर विश्व के अन्य देशों में बढी चिंता तथा चीन की सेना की स्वयं की मह्त्वाकाँक्षा को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि आने वाले दिनों में चीन की विदेश और आंतरिक नीतियों में सेना की भूमिका और भी अधिक बढने वाली है। इस दृष्टि से वर्ष 2012 के बाद चीन की नीतियों की दिशा क्या होती है इस पर दृष्टि रखना आवश्यक होगा विशेषकर भारत के लिये।
वेबसाइट ने पिछले दिनों चीन की यात्रा पर गये अमेरिकी रक्षा मंत्री राबर्ट गेट्स की यात्रा के दौरान चीन द्वारा जे 20 की आधुनिक लडाकू विमान के परीक्षण की जानकारी चीनी राष्ट्रपति हू जिंटाओ को नहीं थी इससे सम्बन्धित गेट्स के प्रश्न पर चीन के राष्ट्रपति हू जिन्टाओ बुरी तरह चौंक गये जिसके आधार पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इस परीक्षण के लिये राबर्ट गेट्स की यात्रा के समय का चयन करते समय चीन की सेना ने सरकार से अनुमति या विचार विमर्श नहीं किया था।
वेबसाइट के अनुसार चीन के नेता माओ और देंग स्वयं सैनिक भी थे इस कारण सैन्य नीतियों और प्राथमिकताओं पर उनकी पकड थी परन्तु आज का नेतृत्व सेना के प्रशिक्षण से नहीं गुजरा है इस कारण चीन की सेना उनकी इस अनुभवहीनता का लाभ उठाकर विदेश नीति और अन्य नीतियों में अपना प्रभाव स्थापित करने में सफल हो रही है। वर्ष 2012 के बाद इस प्रक्रिया में और तीव्रता आ सकती है।
स्ट्रेटफोर के अनुमान के अनुसार चीन की अर्थव्यवस्था का बुलबुला बहुत शीघ्र ही फूटने वाला है और इसकी स्थिति भी जापान, दक्षिण कोरिया , थाइलैंड और अन्य एशिया के उन देशों की भाँति हो सकती है जो तेजी से विकास दर और आर्थिक विकास के बाद संकट के दौर से गुजरे। अनुमान के अनुसार चीन में इस स्थिति में प्रांतीय विभाजन और आंतरिक टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसके साथ ही पिछले एक दशक में चीन में सेना के बढते हस्तक्षेप से इसकी सामरिक मह्त्वाकाँक्षा को लेकर अनेक देश इससे सतर्क होने लगे हैं। इस कारण चीन की सेना अब अपनी सामुद्रिक और वायुमार्ग की सैन्य क्षमता अन्य देशों से कई गुना अधिक करने में जुटी है।
वेबसाइट के ताजा अनुमान के अनुसार एक ओर चीन की आर्थिक स्थिति के अधिकतम बिंदु पर पहुँच जाने के बाद आने वाले ठहराव और उससे निपटने का संकट, पिछले कुछ वर्षों में इसके सैन्य प्रदर्शन को लेकर विश्व के अन्य देशों में बढी चिंता तथा चीन की सेना की स्वयं की मह्त्वाकाँक्षा को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि आने वाले दिनों में चीन की विदेश और आंतरिक नीतियों में सेना की भूमिका और भी अधिक बढने वाली है। इस दृष्टि से वर्ष 2012 के बाद चीन की नीतियों की दिशा क्या होती है इस पर दृष्टि रखना आवश्यक होगा विशेषकर भारत के लिये।
गुरुवार, 20 जनवरी 2011
हिन्दू आंतकवाद: सच्चाई या दुष्प्रचार

इन दिनों अनेक विषय चर्चा में हैं उनमें से एक चर्चा यह कुछ हिंदूवादी संगठनों के सदस्यों की उग्रवादी घटनाओं में लिप्तता भी है। इस पूरी चर्चा के दो भाग हैं। कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने अनेक हिंदूवादी संगठनों पर कुछ गम्भीर आरोप लगाये और इन घटनाओं के आधार पर हिंदू आतंकवाद शब्दावली ही प्रचलित कर दी। बाद में इसकी आलोचना होने के बाद इसे कुछ दक्षिणपन्थी सदस्यों का आतंकवाद कहा गया। देश के कुछ हिंदूवादी संगठनों के के बारे में लगे आरोपों को लेकर देश का प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा इस पूरे विषय में जिस प्रकार इन संगठनों के सदस्यों को क्लीन चिट दे रहा है उसे क्या आप उचित मानते हैं?
यदि आरोपों की जाँच के क्रम में किसी को क्लीन चिट देने का अर्थ जाँच की पूरी प्रकिया को ही बेमानी करार देने जैसा है। यदि कल को ये आरोप सही पाये गये तो इस राजनीतिक दल की छवि पर क्या प्रभाव होगा? यदि यह मान भी लिया जाये कि कुछ हिंदुओं ने उग्रवादी घटनाओं को अंजाम दिया है तो भी क्या राज्य का यह दायित्व नहीं बनता कि वह हर प्रकार के उग्रवाद की जाँच करे ऐसे में एक राजनीति दल होकर किसी को जाँच की रिपोर्ट आने से पहले क्लीन चिट देना कहाँ तक उचित है?
जब कांग्रेस ने हिंदू आतंकवाद शब्दावली से अपने हाथ खींच लिये हैं तो क्या अब कुछ हिंदू सदस्यों की उग्रवादी गतिविधियों में संलिप्तता की निष्पक्ष जाँच होने देनी चाहिये और हिंदू उत्पीडन या किसी संगठन के प्रति दुर्भावना का कार्ड किसी को नहीं खेलना चाहिये।
चर्चा का दूसरा भाग यह है कि शांति और सहिष्णुता के लिये जाने जाने वाले हिंदू ने किस कारण अपने हाथों में हथियार उठा लिये? कृपया इस चर्चा में अपने विचार व्यक्त करें। (sabhaar lokmanch.com)
यदि आरोपों की जाँच के क्रम में किसी को क्लीन चिट देने का अर्थ जाँच की पूरी प्रकिया को ही बेमानी करार देने जैसा है। यदि कल को ये आरोप सही पाये गये तो इस राजनीतिक दल की छवि पर क्या प्रभाव होगा? यदि यह मान भी लिया जाये कि कुछ हिंदुओं ने उग्रवादी घटनाओं को अंजाम दिया है तो भी क्या राज्य का यह दायित्व नहीं बनता कि वह हर प्रकार के उग्रवाद की जाँच करे ऐसे में एक राजनीति दल होकर किसी को जाँच की रिपोर्ट आने से पहले क्लीन चिट देना कहाँ तक उचित है?
जब कांग्रेस ने हिंदू आतंकवाद शब्दावली से अपने हाथ खींच लिये हैं तो क्या अब कुछ हिंदू सदस्यों की उग्रवादी गतिविधियों में संलिप्तता की निष्पक्ष जाँच होने देनी चाहिये और हिंदू उत्पीडन या किसी संगठन के प्रति दुर्भावना का कार्ड किसी को नहीं खेलना चाहिये।
चर्चा का दूसरा भाग यह है कि शांति और सहिष्णुता के लिये जाने जाने वाले हिंदू ने किस कारण अपने हाथों में हथियार उठा लिये? कृपया इस चर्चा में अपने विचार व्यक्त करें। (sabhaar lokmanch.com)
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