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शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013

ब्लास्ट: कब तक मरते रहेंगे! किस गलती की सजा मिली

नई दिल्ली। हैदराबाद बम ब्लास्ट में 16 लोगों की मौत हो गई और 117 लोग जख्मी हुए। सवाल ये है कि इन लोगों का कसूर क्या था। आखिर आतंक के आका बेगुनाहों की हत्या और परिवारों को तबाह करके कौन सा मकसद हासिल करना चाहते हैं। हैदराबाद धमाकों के पीड़ित रोते बिलखते परिवारों को पता भी नहीं है, कि आखिर हर बार वो क्यों बनते हैं शिकार।


तस्वीर वही है। बस चेहरा बदला है। दर्द वही है बस किरदार बदल गए हैं। सालों से लगातार आतंक का शिकार हो रहे हैं ये लोग। दो जून के रोटी के जुगाड़ में दिन रात हाड़ तोड़ रहे ये लोग जीने की जद्दोजहद कर रहे थे। जिंदगी क्या पहले ही कम मुश्किल थी। जो इसे और दूभर बना दिया चंद नफरत पसंद लोगों ने।



मरने वाले एक युवक सईदा की मां रोए जा रही है। अस्पताल के बाहर जो आ रहा है इसे चुप कराने की कोशिश कर रहा है। लेकिन मां का कलेजा मानों फटा जा रहा है। आंसू रोके नहीं रुक रहे हैं। घंटों बीत गए। गले ने साथ छोड़ दिया है। लेकिन अपने बेटे की हालत ने उसे बेहाल कर दिया है।


एल सईदा नायक नाम का ये युवक नालगोंडा का रहने वाला था। अपने घर से दूर हैदराबाद के दिलखुश नगर में रहकर वो इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। शहर में अकेले रहकर अपने परिवार के सपने को साकार करने जुटा हुआ था। सबकुछ बेच कर पूरा परिवार उसे पढ़ाने में जुटा था। जैसे ही मां को बेटे के हालत की खबर मिली वो नालगोंडा से भागी चली आई। अब अपने रिश्तेदारों के साथ वो बेटे की खैर मनाने में जुटी है।


अस्पताल के बिस्तर घायलों से भरे हैं। जहां तक निगाह जाती है रोते बिलखते और दर्द से कराहते लोग। किसी की टांग चली गई। तो किसी के शरीर में घुसे लोहे के टुकड़ों की वजह से कई ऑपरेशन करने पड़े। यहीं पैसठ साल के डी हथिय्या की बहू का रो रो कर बुरा हाल है। मजदूरी कर अपनी जिंदगी गुजारने वाला ये परिवार अपनी छोटी सी बच्ची अर्चना का इलाज कराने नालगोंडा से हैदराबाद आया था।


डॉक्टर से बेटी को दिखाने के बाद ये लोग दिलसुख नगर के बस स्टैंड के पास नालगोंडा वापस जाने के लिए पहुंचे। तभी तेज धमाका हुआ। और इस धमाके में पूरा परिवार जख्मी हो गया। परिवार के सभी सात लोग धमाके की चपेट में आए। दो की हालत गंभीर है, एक का पैर काटना पड़ा। जबकि कई शरीर पर हल्के जख्म लेकर दर्द से जूझ रहे हैं। नन्ही बच्ची अर्चना की बहन जिंदगी और मौत से जूझ रही है। जबकि अर्चना को भी हल्की चोट लगी है।


चेहरे अलग हैं लेकिन दर्द एक है। आंतकियों की नापाक करतूत ने इन्हें सिर्फ एक दिन का दर्द नहीं दिया है। ये जख्म जिंदगी भर के हैं। इस बुजुर्ग दंपत्ति को समझ में नहीं आ रहा है कहां जाए, क्या करे। किससे जाकर अपने दिल का दर्द बयान करें। घर का कमाने वाला बेटा धमाके में बुरी तरह से घायल होकर क्रिटिकल केयर यूनिट में पड़ा है।


चालीस साल के यदागिरी गौड़ के मां-बाप का भी ऐसा ही हाल है। वो एक रियल इस्टेट फर्म में काम करते थे। अपनी कंपनी का कंप्यूटर ठीक कराने वो गुरुवार शाम दिलसुख नगर पहुंचे थे। लेकिन बम के शिकार हो गए। ये बुजुर्ग मां बाप अब बस इतना चाहते हैं किसी तरह उनका बेटा ठीक हो जाए।


किससे पूछें ये कि आखिर इन्हें किस गलती की सजा मिली है। किससे कहें ये कि सियासत, धर्म, जात से ज्यादा बड़ी चीज इनके लिए जिंदगी की जद्दोजहद है। सुबह और शाम की दो रोटी है। बच्चों का भविष्य है। किसे बताएं ये कि जिंदगी में इन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया कि इन्हें उसकी ऐसी सजा मिलनी चाहिए। किससे जाहिर करें ये अपना गुस्सा सरकार की उस नाकामी पर जो इन्हें हर बार शिकार बनने के लिए सड़कों पर छोड़ देती है। आखिर कब तक ये यूं ही मरते और घायल होते रहेंगे।

क्या यही हकीकत है ‘सच्चे मुसलमानों’ की? -तनवीर जाफ़री

ानता, सहयोग, भाईचारा, समर्पण, त्याग, संतोष तथा क्षमा और बलिदान जैसी विशेषताओं का पाठ पढाने वाले इस्लाम धर्म का लगता है कुछ धुर इस्लाम विरोधी विचारधारा रखने वालों ने संभवत: किसी बड़ी इस्लाम विरोधी साजिश के तहत अपहरण कर लिया है। अन्यथा गत् तीन दशकों में इस्लाम के नाम पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किए जाने वाले कत्लो ग़ारत तथा इसी के नाम पर फैलाई जाने वाली नफरत व विद्वेष की ऐसी आंधी चलते पहले कभी नहीं देखी गई। जेहाद के नाम पर आत्मघाती हमलावरों में लगातार होता आ रहा इजाफा पहले ऐसा कभी नहीं देखा गया। मरो और मारो जैसा रक्तरंजित मिशन कई मुस्लिम या मुंगल शासकों द्वारा तो भले ही सत्ता को छीनने, कब्‍जा जमाने या उसे सुरक्षित रखने के नाम पर तो भले ही मध्ययुगीन काल में क्यों न चलाया गया हो। परंतु वर्तमान दौर में इस्लाम के नाम पर इस्लाम को बदनाम व शर्मिंदा करने वाले घृणित अपराध तो उन लोगों द्वारा अंजाम दिए जा रहे हैं जो दुर्भाग्यवश स्वयं को ही सच्चा व वास्तविक मुसलमान बता रहे हैं, ऐसा अंधेर कम से कम इस्लाम के इतिहास में तो कभी देखने को नहीं मिला।

इन तथाकथित स्वयंभू इस्लामी ठेकेदारों की नारों में ईसाई, हिंदू, बौद्ध,सिख तथा यहूदी व पारसी आदि धर्मों के अनुयायी तो अविवादित रूप से कांफिर की हैसियत रखते ही हैं। लिहाजा इन सिरफिरों का इस्लाम इन समुदायों के लोगों को इन्हें गोया हर वक्त ज़हां भी चाहे मौत के घाट उतार देने का ‘अधिकार पत्र’ प्रदान करता है। इन ‘सच्चे मुसलमानों’ की सीख व शिक्षा इन्हें यह बताती है कि तुम इन्हें मार कर भी विजेता कहलाओगे और तुम्हारी जन्नत पक्की होगी और यदि इन्हें मारने के दौरान तुम खुद मारे गए तो भी तुम शहीद समझे जाओगे। और ऐसे में भी जन्नत तुम्हारी ही है। इनके जुल्‍मो-सितम की सूची में केवल उपरोक्त समुदायों के लोग ही शामिल नहीं हैं। दुनिया में मुसलमानों का एक कांफी बड़ा वर्ग जिन्हें हम सूफीवादी मुसलमानों के नाम से जानते हैं वे भी इनके निशाने पर हैं। इनको भी मारना या इनको मारते समय ख़ुद मर जाना भी इन ‘सच्चे मुसलमानों के लिए जन्नत का सबब बनता है। बरेलवी मुसलमान, शिया मुसलमान, कादियानी(अहमदिया) इन सभी इस्लामी वर्ग से जुड़े लोगों के यह ‘सच्चे व वास्तविक मुसलमानों’ के स्वयंभू ठेकेदार वैसे ही दुश्मन हैं जैसे कि गैर मुस्लिमों के।

सवाल यह है कि इन मौत के सौदागरों को इस बात का अधिकार किसने दिया कि वे यह प्रमाणित करते फिरें कि सच्चा मुसलमान कौन है, जन्नत में कौन और कैसे जाएगा तथा किस व्यक्ति को कौन सी पूजा पद्धति अथवा विश्वास पर अमल करना चाहिए। जिन बरेलवी व सूंफी इस्लामपरस्तों को यह ‘सच्चे मुसलमान’ अपना दुश्मन तथा गैर मुस्लिम मानते हैं, यह वर्ग इस्लाम के सूफीवाद के पहलू की पैरवी करता है। पीरी-फकीरी तथा सूंफीवाद इस्लाम के उस पक्ष की रहनुमाई करते हैं जिसमें कि सभी को समान समझना, सभी के प्रति सहिष्णुता से पेश आना तथा अल्लाह के प्रति अपनी सच्ची आस्था रखते हुए किसी दूसरे धर्म व विश्वास के अनुयाईयों का दिल न दुखाना भी शामिल है। एक ओर जहां यह समुदाय अपनी इसी फकीरी व सूंफीवाद की राह पर चलते हुए अपने पीरो मुर्शिद के माध्यम से स्वयं को अल्लाह तक पहुंचता हुआ देखता है वहीं मौत के सौदागर बने बैठे यह ‘वास्तविक मुसलमान’ उन्हें इस्लाम का दुश्मन होने का प्रमाण पत्र जारी कर देते हैं। इसी प्रकार शिया समुदाय के भी यह ‘वास्तविक मुसलमान’ वैसे ही दुश्मन हैं। पाकिस्तान में शिया समुदाय की दर्जनों मस्जिदों पर इसी इस्लाम विरोधी विचारधारा रखने वाले तथाकथित ‘सच्चे मुसलमानों’ ने कई बार कभी आत्मघाती हमला किया तो कभी उनपर गोलियां बरसा कर हमले किए। केवल पाकिस्तान में शिया समुदाय के सैकड़ों लोग इनके हाथों मारे जा चुके हैं।

अब जरा उस शिया समुदाय का संक्षिप्त परिचय भी सुन लीजिए जिन्हें यह ‘सच्चे मुसलमान’कभी इस्लाम विरोधी, तो कभी गैर मुस्लिम या प्राय: कांफिर तक बता देते हैं। शिया समुदाय, हजरत मोहम्मद को इन्हीं ‘सच्चे मुसलमानों’ की ही तरह आंखिरी नबी तो अवश्य मानता है। परंतु उनके बाद यह समुदाय इमामत की उस परंपरा को स्वीकार करता है जिसके पहले इमाम हजरत अली थे। उनके पश्चात उनके बेटे हसन और हुसैन से होता हुआ यह सिलसिला 12 इमामों तक पहुंच कर समाप्त हुआ। और बारहवें इमाम हजरत इमाम मेंहदी पर जाकर ख़त्म हुआ। इस्लामी तारींख में हजरत मोहम्मद की एकमात्र बेटी हजरत फातिमा के विषय में तमाम ऐसी अविवादित बातों का उल्लेख है जिन्हें सभी मुस्लिम वर्गों के लोग निर्विवादित रूप से मानते हैं। गोया हजरत फातिमा के रुतबे से कोई भी मुस्लिम वर्ग इंकार नहीं कर सकता। उस हजरत फातिमा तथा उनके पति हजरत अली जोकि मोहम्मद साहब के भतीजे भी थे,का गुणगान करने वालों तथा उनके प्रति अपनी अटूट आस्था व विश्वास रखने वाले शिया समुदाय को इन मौत के सौदागरों द्वारा कांफिर या गैर मुस्लिम होने का प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है। यानि इन्हें भी चाहे मस्जिद में मारो या इमामबाड़ों में, या फिर इनके द्वारा करबला के शहीदों की याद में निकाले जाने वाले जुलूसों के दौरान। गत् वर्ष पाकिस्तान में मोहर्रम के जुलूस में आत्मघाती हमलावरों द्वारा शिया समुदाय के सैकड़ों लोगों का मारा भी गया। इन ‘सच्चे मुसलमानों’ की ऐसी कारगाुारियों से भी इनकी जन्नत पक्की हो जाती है।

जाहिर है जब यह शिया व बरेलवी मुसलमानों को मुसलमान नहीं मानते तो उन कादियानी अथवा अहमदियों को यह मुसलमान कैसे मानेंगे जिनका वजूद ही भारत के पंजाब स्थित कादियान कस्बे में हुआ। अहमदी समुदाय के संस्थापक गुलाम अहमद कादियानी ने 1889 में इस पंथ की बुनियाद डाली। वैसे तो निश्चित रूप से अहमदिया पंथ, शांति, प्रेम, सद्भाव व भाईचारा जैसी उन सभी शिक्षाओं को प्रचारित व प्रसारित करता है जोकि इस्लाम धर्म की बुनियादी शिक्षाएं हैं। परंतु उनके प्रमुख द्वारा स्वयं को हजरत ईसा अथवा हजरत इमाम मेंहदी का रूप घोषित करना ‘सच्चे मुसलमानों’ को रास नहीं आता। और इसी की साा इस समुदाय को समय-समय पर भुगतनी पड़ती है।

अहमदिया समुदाय के प्रति इनकी नंफरत कोई पाकिस्तान तक ही सीमित नहीं है। बल्कि यह विश्वव्यापी है। इंडोनेशिया में इन्हीं ‘सच्चे इस्लाम’ समर्थकों के कठमुल्लाओं की भीड़ ने अहमदिया समुदाय की एक मस्जिद को तोड़कर खंडहर बना दिया था। बंगलादेश में भी इनके विरुद्ध यही ताकतें प्राय:अपने विरोध स्वर बुलंद करती रहती हैं। इसी नफरत ने 1974 में पाकिस्तान में संसद द्वारा इन्हे ग़ैर मुस्लिम घोषित किए जाने की नौबत तक पहुंचा दिया था। उसके पश्चात जिया-उल- हंक के शासन में तो गोया अहमदिया समेत सभी मुस्लिम वर्गों के विरुद्ध ‘सच्चे मुसलमानों’ ने स्वयं को कांफी माबूत व संगठित कर लिया। और नंफरत की यही आग फैलते-फैलते पिछले दिनों अर्थात् 28मई 2010 शुक्रवार को यहां तक पहुंची कि उस दिन पाकिस्तान के लाहौर शहर में अहमदी समुदाय की दो मस्जिदों पर जुम्मे की नमाज के दौरान ‘सच्चे मुसलमानों’ के आतंकी तथा आत्मघाती दस्तों ने धावा बोल दिया। मौत और जन्नत के इस ख़ूनी खेल में आत्मघाती हमलावर तो ‘जन्नत की राह’ सिधारे ही साथ-साथ लगभग 80 अहमदी समुदाय के नमााियों को भी न चाहते हुए भी अपने साथ ही समय से पूर्व जन्नत में ले गए।

असहिष्णुता तथा कट्टरवादी इस्लाम के प्रदर्शन की ऐसी पराकाष्ठा क्या इस्लाम धर्म को मान-सम्मान और इात बख्श रही है? जो ताकतें आज स्वयं को सच्चा मुसलमान अथवा इस्लाम का सच्चा रहबर अथवा अनुयायी बता रही हैं उन्हें इतिहास के उन पन्नों को भी पलटकर सबक लेना चाहिए जो हमें यह बताते हैं कि चंद मुंगल व मुसलमान शासकों के बलपूर्वक सत्ता संघर्ष के परिणामस्वरूप इस्लाम धर्म को अब तक कितनी शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है। पेशेवर इस्लाम विरोधियों को जहां इतिहास की वह घटनाएं उर्जा प्रदान करती हैं वहीं इन स्वयंभू सच्चे मुसलमानों के काले कारनामे भी उसी इस्लाम को बदनाम करने में अपना कम किरदार अदा नहीं करते। लिहाजा इन तथाकथित वास्तविक मुसलमानों द्वारा हर जगह मौत बांटे जाने तथा ख़ून की होलियां खेले जाने के सिलसिले से तो अब इनकी हकीकत कुछ ऐसी ही प्रतीत हो रही है गोया यह शक्तियां स्वयं इस्लाम कीसबसे बड़ी दुश्मन हैं तथा यह किसी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चलने वाली इस्लाम विरोधी साजिश का एक बहुत बड़ा हिस्सा हैं और यही इन सच्चे मुसलमानों की हकीकत है।

हिंदू लेखक के हत्‍यारे को सम्‍मानित करने की मांग, मुलायम ने पड़ोसी को बताया भाई

नई दिल्‍ली। हैदराबाद को दहलाने के पीछे जहां खुफिया एजेंसियों को पाकिस्‍तान पर शक है तो वहीं, पाकिस्‍तान में हिंदू लेखक के हत्‍यारे को सम्‍मानित करने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। इन सबके बीच, सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने कहा है कि पाकिस्तान भारत के छोटे भाई के जैसा है। अगर दोनों पड़ोसियों के बीच संबंध सुधरेंगे तो वे सुपरपॉवर बनेंगे। मुरादाबाद में एक दीक्षांत समारोह में उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने की कोशिश नहीं कर रहा है।

पाकिस्तान में हिंदू लेखक राजपाल की हत्या का मामला 84 साल बाद अब खुलेगा। इसलिए नहीं कि उनकी हत्या में किसी को सजा नहीं मिली या कोई निर्दोष सजा पा गया। वह इसलिए खुलेगा क्योंकि हत्या करने वाले ने लेखक को ईशनिंदा का दोषी मानते हुए मारा था। अब उसे हत्या के आरोप से बरी करते हुए सम्मानित किए जाने की मांग की जा रही है।

लाहौर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस उमर अता बांदियाल ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई की। अगली सुनवाई 14 मार्च को होगी। लाहौर हाई कोर्ट ने ही 1929 में राजपाल की हत्या के आरोप में गाजी इलामुद्दीन को फांसी की सजा सुनाई थी।

अब ‘सेव द ज्युडिशियरी कमेटी’ के इम्तियाज रशीद ने कोर्ट में याचिका दाखिल की है। उसके वकील ने कहा कि ‘राजपाल की किताबों में कई जगह ईशनिंदा है। उसने खुद अपनी मौत बुलाई थी।’ गाजी इलामुद्दीन को राजपाल से कोई निजी दुश्मनी नहीं थी। उसने पैगंबर से सच्चे प्यार की खातिर हत्या की थी। याचिका में कोर्ट से यह मांग भी की गई है कि वह इलामुद्दीन को ‘निर्दोष करार’ होने के बाद राजकीय सम्मान से दफनाने और सम्मानित करने के निर्देश दे।

हैदराबाद से ही खरीदा विस्फोटक, धमाकों में पांच स्लीपर सेल का हाथ?

नई दिल्‍ली/हैदराबाद. हैदराबाद धमाकों के मामले में खबरहै कि इन धमाकों को पांच स्लीपर सेल की टीम ने अंजाम दिया था। पुलिस सूत्रों के हवाले से खबर है कि धमाकों में इस्तेमाल के लिए विस्फोटक हैदराबाद से ही खरीदे गए थे। वहीं विस्फोट के तार बिहार के दरभंगा से भी जुड़े होने की भी संभावना है। इसकी जांच करने एनआईए की एक टीम दरभंगा भी जाएगी।

वहीं दंगों के बाद शुक्रवार को गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के लोकसभा और राज्यसभा में दिए बयान का काफी विरोध हुआ। उन्‍होंने कहा था कि स्थिति काबू में है, लेकिन लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्‍वराज ने यह कहते हुए उन्‍हें घेरा कि जब इनपुट पहले से उपलब्‍ध था तो एहतियातन कार्रवाई क्‍यों नहीं की गई? राज्‍यसभा में तो भाजपा के नेता वेंकैया नायडू ने गृह मंत्री के लिए असंसदीय शब्‍द का इस्‍तेमाल तक कर दिया। राज्यसभा में बयान देने के लिए देर से आने से गुस्साए वेंकैया नायडू ने कहा- भाड में जाएं गृह मंत्री। इसके बाद कांग्रेसी सांसदों ने खूब हंगामा किया और कार्यवाही स्‍थगित करनी पड़ी। सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि गृहमंत्री के बयान में ठोस कारणों के बजाए पुलिस थाने में दर्ज रोजनामचे जैसे ब्यौरे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार में इच्छाशक्ति की कमी है।

गृहमंत्री शिंदे ने शुक्रवार शाम पांच बजे राज्यसभा में दोबारा कहा कि वह हैदराबाद धमाके के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दे सकते हैं क्योंकि इससे जांच प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि कसाब और अफजल की फांसी के बाद राज्य सरकारों को तीन बार अलर्ट जारी किए थे लेकिन राज्य अक्सर केंद्र की ओर से जारी किए अलर्ट को गंभीरता से नहीं लेते हैं। शिंदे का कहना था कि सरकार NCTC (नेशनल काउंटर टेरेरिज्म सेंटर) बनाने को तैयार है लेकिन राज्य सरकारें इसके लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बॉर्डर मैनेजमेंट, सीमा पर लाइट लगाने और चारदीवारी बनाने जैसी कोशिशों से देश में हर साल आतंकी घटनाओं में कमी आई है। शुक्रवार शाम को विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी हैदराबाद धमाकों पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस समय देश को एकजुट होने की जरूरत है। ऐसा नहीं हुआ तो दुश्मन हमारे देश पर दोबारा हमला कर सकते हैं।

इसस पहले राज्यसभा का सत्र दोपहर तीन बजे बाद दोबारा शुरू होने पर विपक्षी सांसदों ने हंगामा किया। सभापति हामिद अंसारी ने घोषणा की कि गृहमंत्री राज्यसभा में हैदराबाद धमाकों पर बयान देंगे लेकिन विपक्षी सांसद शांत नहीं हुए। अंसारी को तीन बार अपनी चेयर से उठकर सांसदों को शांत कराना पड़ा। गृहमंत्री ने हंगामे के बीच ही अपना बयान पढ़ा। वेंकैया का कहना था कि उन्हें गृहमंत्री के बयान से निराशा हुई है। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री चाहते तो रात में हैदराबाद जाकर सुबह आकर संसद में बयान देते लेकिन वह दोपहर बाद संसद में आए हैं और उच्च सदन में तीन बजे आ रहे हैं। वेंकैया का कहना था कि अब तक विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी कोई बयान नहीं दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास आतंक से निपटने के लिए कोई नीति नहीं है। सरकार आतंक से निपटने के लिए अपना रोडमैप बताए।

इससे पहले शिंदे ने दोनों सदनों में कहा था, 'धमाकों के लिए आईईडी का इस्तेमाल किया गया है। धमाकों में मारे गए 16 लोगों की मौत पर सरकार को दुख है। केंद्र और राज्य ने मृतकों के परिजनों को मुआवजे की घोषणा की है। फोंरेसिक टीम को काफी सबूत मिले हैं और धमाकों के दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी।'

गृह मंत्री के संक्षिप्त बयान के बाद विपक्ष ने उन्हें घेर लिया। नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने कहा कि सुबह से गृहमंत्री के बयान का इंतजार कर रहे थे। लेकिन ये बयान रूटीन में दिया गया है। इससे हमारे सवालों का जवाब नहीं मिला है। सुषमा ने कहा कि नौ साल बाद अफजल को फांसी पर लटकाया। इस काम में इतनी देर क्यों की गई, इसकी प्रतिक्रिया संवेदनशील इलाकों में हो सकती थी। हैदराबाद जैसे संवेदनशील शहर में अलर्ट जारी होना चाहिए था। क्या केंद्र की जिम्मेदारी महज राज्य को सूचना देना है या आतंकी घटना को रोकने में मदद करना भी है। अगर केंद्र सरकार ने मदद की है तो क्या?

सुषमा का कहना था कि आतंकवाद के मसले पर केंद्र राज्य के भरोसे नहीं रह सकता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद सामान्य कानून प्रक्रिया का मामला नहीं है। दूसरे शहरों में ऐसी आतंकी घटना न हो इसके लिए क्या तैयारी की गई है? ओवैसी का नाम लिए बिना कहा कि उनके भड़काऊ भाषण का इस विस्फोट से कोई संबंध है? आतंकी घटनाओं में मिलने वाले मुआवजे की राशि एक समान क्यों नहीं है? नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि देश सभी नेताओं के कमिटमेंट चाहता है। सभी दलों की सोच में समानता आने पर ही देश आतंकवाद का सामना कर सकता है।

सुषमा के बयान के बाद केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने कहा कि सरकार विपक्ष के सवालों पर संसद में बहस को तैयार है। लेकिन विपक्षी सांसद हंगामा करने लगे। इसके बाद डिप्टी स्पीकर ने लोकसभा को दोपहर 3.30 तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी।

इसी बीच, राज्‍यसभा में गृह मंत्री के बयान की मांग जोर पकड़ने लगी। बताया गया कि गृह मंत्री अभी लोकसभा में बयान दे रहे हैं। इसके बाद वह राज्‍यसभा आएंगे। तब तक के लिए सदन स्‍थगित कर दिया जाए। इस पर वेंकैया ने कहा, 'गृह मंत्री भाड़ में जाएं।'

बुधवार, 20 फ़रवरी 2013

चीन दलेगा हमारी छाती पर मूंग! ,हेग में भारत से हारा पाकिस्‍तान

इस्लामाबाद। पाकिस्तान का सामरिक महत्व वाला ग्वादर बंदरगाह अब चीन की एक कंपनी के नियंत्रण में रहेगा। इस आशय के एक समझौते पर पाकिस्तान और चीन ने सोमवार को हस्ताक्षर किए। भारत में इस मुद्दे पर कड़ी चिंता जताई गई है। हालांकि पाकिस्तान ने इस चिंता को खारिज किया है।

समझौते के अनुसार, गहरे समुद्र वाला यह बंदरगाह पाकिस्तान की ही संपत्ति रहेगा। लेकिन चीन की कंपनी इस बंदरगाह से होने वाले कामकाज के लाभ की हिस्सेदार रहेगी। चाइना ओवरसीज पोर्ट होल्डिंग्स लि. ने बलूचिस्तान प्रांत में स्थित ग्वादर बंदरगाह का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। इस मौके पर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा कि इससे पाकिस्तान और चीन के रिश्ते मजबूत होंगे।

भारतीय सीमा से नजदीक होने के कारण बंदरगाह चीन की कंपनी को सौंपे जाने का समझौता भारत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है  इस बीच, पाकिस्‍तान अंतरराष्‍ट्रीय न्‍यायालय (हेग) में भारत के खिलाफ एक मुकदमा हार गया है। इसके मुताबिक किशनगंगा प्रोजेक्‍ट के लिए भारत द्वारा पानी के इस्‍तेमाल पर उसकी आपत्ति खारिज हो गई है। इस मामले को अंतरराष्‍ट्रीय न्‍यायालय में पाकिस्‍तान ही ले गया था।

फूकीं गाडि़यां, फैक्ट्रियों में की तोड़फोड़, कर्मचारी नेता की मौत

हड़ताल के दौरान उत्तर प्रदेश के नोएडा भी जमकर तोड़फोड़ हुई। इस दौरान सरकारी वाहनों को सबसे पहले निशाना बनाया गया। आम राहगीरों को पीटा गया। नोएडा फेज-टू में सीटू समर्थक हड़ताल के दौरान भड़क गए और उन्होंने कई वाहनों में आग लगा दी। सीटू समर्थकों ने यहां से गुजरने वाले लोगों को इन नई दिल्ली. 11 केंद्रीय मजदूर यूनियनों की ओर से बुलाए गए दो दिनों के बंद की शुरुआत हिंसा से हुई और देश के अलग-अलग इलाकों से हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ (देखें तस्‍वीरें) की खबरें आती रहीं। हरियाणा के अंबाला में ट्रेड यूनियन नेता नरेंद्र सिंह काका की अम्बाला रोडवेज डिपो में बस व गेट पिल्लर के बीच फंसने से मौत हो गई। नरेंद्र सिंह ट्रेड यूनियन एआईटीयूसी के कोषाध्यक्ष थे।

एआईटीयूसी के महासचिव गुरुदास दासगुप्ता ने इस बारे में कहा, 'अंबाला बस स्टैंड के पास कुछ असामाजिक तत्वों ने नरेंद्र की हत्या कर दी। हत्या करने वाले हड़ताल के बावजूद बस डिपो से बस ले जाना चाहते थे।' नरेंद्र सिंह की मौत पर अंबाला में दिन भर तनाव रहा। रोडवेज यूनियन ने नरेंद्र सिंह के परिवार के लिए 20 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है। इस मांग पर सरकार का रुख साफ नहीं है। कार्यकर्ताओं ने अपना निशाना बनाया। इन कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने नोएडा फेज-टू के हौजरी कांप्‍लेक्‍स की करीब 400 फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की। इस घटना में 15-20 लोग घायल हुए। फेज-टू के सीओ की गाड़ी भी प्रदर्शनकारियों ने जला दी। नोएडा के सेक्टर-63 में भी तोड़फोड़ हुई। नोएडा के सेक्‍टर 57 और लेबर चौक के आसपास के ऑफिसों में हड़ताल समर्थकों ने जमकर उत्‍पात मचाया। कई ऑफिसों के शीशे तोड़ दिए गए। जिसके बाद इन ऑफिसों को बंद कर दिया गया। कई जगह कर्मचारियों ने वाहनों में आग लगा दी। नोएडा फेज-टू में हुई इस हिंसा के बाद यहां काफी तनाव का माहौल बना रहा। प्रशासन ने एहतियातन नोएडा फेज-टू और अन्‍य कई इलाकों में सुरक्षा को कड़ा कर दिया। नोएडा पुलिस के अलावा गाजियाबाद से भी पुलिस बल को बुलाया गया। एडीजी (एनसीआर) ओपी सिंह ने एहतियातन नोएडा पहुंचकर खुद हालात का जायजा लिया। कई प्रदर्शनकारियों पर गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

वरिष्‍ठ माकपा नेता वृंदा करात ने हिंसा की घटनाओं की निंदा की। इंटक अध्‍यक्ष संजीवा रेड्डी ने कहा कि हम शांतिपूर्वक हड़ताल कर अपनी बात सरकार तक रखना चाहते हैं, लेकिन ऐसी हिंसा के हम कतई पक्षधर नहीं है। यह सही नहीं है। हमें अफसोस है और ऐसा नहीं होना चाहिए था। इस घटना की संगठन जांच-पड़ताल करेगा और संगठन के संबंधित पदाधिकारियों से इस बाबत जवाब मांगा जाएगा।