इस्लामाबाद। पाकिस्तान का सामरिक महत्व वाला ग्वादर बंदरगाह अब चीन की एक कंपनी के नियंत्रण में रहेगा। इस आशय के एक समझौते पर पाकिस्तान और चीन ने सोमवार को हस्ताक्षर किए। भारत में इस मुद्दे पर कड़ी चिंता जताई गई है। हालांकि पाकिस्तान ने इस चिंता को खारिज किया है।
समझौते के अनुसार, गहरे समुद्र वाला यह बंदरगाह पाकिस्तान की ही संपत्ति रहेगा। लेकिन चीन की कंपनी इस बंदरगाह से होने वाले कामकाज के लाभ की हिस्सेदार रहेगी। चाइना ओवरसीज पोर्ट होल्डिंग्स लि. ने बलूचिस्तान प्रांत में स्थित ग्वादर बंदरगाह का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। इस मौके पर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा कि इससे पाकिस्तान और चीन के रिश्ते मजबूत होंगे।
भारतीय सीमा से नजदीक होने के कारण बंदरगाह चीन की कंपनी को सौंपे जाने का समझौता भारत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है इस बीच, पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (हेग) में भारत के खिलाफ एक मुकदमा हार गया है। इसके मुताबिक किशनगंगा प्रोजेक्ट के लिए भारत द्वारा पानी के इस्तेमाल पर उसकी आपत्ति खारिज हो गई है। इस मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पाकिस्तान ही ले गया था।
समझौते के अनुसार, गहरे समुद्र वाला यह बंदरगाह पाकिस्तान की ही संपत्ति रहेगा। लेकिन चीन की कंपनी इस बंदरगाह से होने वाले कामकाज के लाभ की हिस्सेदार रहेगी। चाइना ओवरसीज पोर्ट होल्डिंग्स लि. ने बलूचिस्तान प्रांत में स्थित ग्वादर बंदरगाह का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। इस मौके पर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा कि इससे पाकिस्तान और चीन के रिश्ते मजबूत होंगे।
भारतीय सीमा से नजदीक होने के कारण बंदरगाह चीन की कंपनी को सौंपे जाने का समझौता भारत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है इस बीच, पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (हेग) में भारत के खिलाफ एक मुकदमा हार गया है। इसके मुताबिक किशनगंगा प्रोजेक्ट के लिए भारत द्वारा पानी के इस्तेमाल पर उसकी आपत्ति खारिज हो गई है। इस मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पाकिस्तान ही ले गया था।

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