अजमेर [जागरण संवाददाता]। विश्वप्रसिद्ध ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की
दरगाह आ रहे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ को असहज परिस्थितियों
का सामना करना पड़ सकता है। दरगाह के दीवान जैनुल ओबेदीन खान ने घोषणा की
है कि वे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के लिए जियारत नहीं करेंगे। हाल ही में
सीमा पर पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा भारतीय सैनिकों की बर्बरतापूर्वक हत्या
का विरोध करने के लिए जैनुल ओबेदीन ने यह कदम उठाया है।
दूसरी तरफ, अजमेर के वकीलों और व्यापारियों ने भी पाक प्रधानमंत्री की यात्रा के विरोध में शहर में काले झंडे लगाने और बाजार बंद रखने का एलान किया है। शिवसेना और विश्व हिंदू परिषद पहले ही विरोध जताने की बात कह चुके हैं। इस बीच सरकारी प्रतिनिधियों ने दरगाह दीवान और वकीलों, व्यापारियों को मनाने की कोशिश शुरू की जो रात तक जारी रही। दरगाह दीवान ने कहा कि पाकिस्तान सैनिक भारतीय सैनिकों के सिर काट कर ले गए। वहां रह रहे अल्पसंख्यकों को परेशान किया जा रहा है। अच्छा होता पाक प्रधानमंत्री भारतीय सैनिकों के सिर अपने साथ लाते और अपने गुनाहों की माफी मांगते।
उन्होंने कहा कि ख्वाजा साहब की दरगाह विश्व में मुसलमानों का सबसे बड़ा धर्म स्थल है ओर मैं यहां का अध्यात्मिक प्रमुख होने के नाते पाक प्रधानमंत्री की यात्रा का बहिष्कार करता हूं। गौरतलब है कि प्राचीन परंपराओं के मुताबिक, किसी भी राष्ट्राध्यक्ष की जियारत और अगुवाई सबसे पहले दरगाह दीवान द्वारा ही की जाती है। विरोध को देखते हुए अजमेर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। भारी तादाद में सुरक्षा बल तैनात किया गया है।
दूसरी तरफ, अजमेर के वकीलों और व्यापारियों ने भी पाक प्रधानमंत्री की यात्रा के विरोध में शहर में काले झंडे लगाने और बाजार बंद रखने का एलान किया है। शिवसेना और विश्व हिंदू परिषद पहले ही विरोध जताने की बात कह चुके हैं। इस बीच सरकारी प्रतिनिधियों ने दरगाह दीवान और वकीलों, व्यापारियों को मनाने की कोशिश शुरू की जो रात तक जारी रही। दरगाह दीवान ने कहा कि पाकिस्तान सैनिक भारतीय सैनिकों के सिर काट कर ले गए। वहां रह रहे अल्पसंख्यकों को परेशान किया जा रहा है। अच्छा होता पाक प्रधानमंत्री भारतीय सैनिकों के सिर अपने साथ लाते और अपने गुनाहों की माफी मांगते।
उन्होंने कहा कि ख्वाजा साहब की दरगाह विश्व में मुसलमानों का सबसे बड़ा धर्म स्थल है ओर मैं यहां का अध्यात्मिक प्रमुख होने के नाते पाक प्रधानमंत्री की यात्रा का बहिष्कार करता हूं। गौरतलब है कि प्राचीन परंपराओं के मुताबिक, किसी भी राष्ट्राध्यक्ष की जियारत और अगुवाई सबसे पहले दरगाह दीवान द्वारा ही की जाती है। विरोध को देखते हुए अजमेर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। भारी तादाद में सुरक्षा बल तैनात किया गया है।