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शनिवार, 16 फ़रवरी 2013

ओवैसी को मिली जमानत

आंध्रप्रदेश। एक स्थानीय अदालत ने भड़काऊ भाषण देने के आरोप में दर्ज मामले में एमआईएम विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी को जमानत दे दी।

निजामाबाद नगर की एक अदालत ने इस शर्त पर अकबरुद्दीन ओवैसी की जमानत मंजूर कर ली कि वह जांच अधिकारी के साथ सहयोग करेंगे। न्यायाधीश ने ओवैसी से यह भी कहा कि वह 10000 रुपए के दो मुचलके जमा करें।

'भड़काऊ भाषण' के लिए देशद्रोह और देश के खिलाफ जंग छेड़ने के आरोप का सामना कर रहे ओवैसी की आवाज 12 फरवरी को रिकॉर्ड की गई थी।

आदिलाबाद के निर्मल इलाके में भी भड़काऊ भाषण देने के मामले में दर्ज एक मुकदमे के सिलसिले में वे नौ जनवरी से ही आदिलाबाद जिला जेल में बंद हैं। इस मामले में उनकी जमानत अर्जी पर आज फैसला आने की संभावना है।

शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2013

हेलिकॉप्टर घोटाला: दलाल का पिता रहा है कांग्रेस पार्टी का करीबी!

नई दिल्ली. देश को हिला देने वाले 3,760 करोड़ रुपये के हेलिकॉप्टर खरीद घोटाले में दलाली के आरोपी क्रिश्चियन मिशेल के पिता वॉल्फगैंग ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की जासूसी भी कर चुका है। मिशेल ने अपने कारोबार का बड़ा हिस्सा अपने पिता वॉल्फगैंग से विरासत में हासिल किया था। वॉल्फगैंग का इतिहास भारत के ताकतवर राजनीतिक पार्टियों से जुड़ा हुआ है। वॉल्फगैंग का भारत की कांग्रेस पार्टी और भारतीय खुफिया एजेंसियों से 1980 और 90 के दशक में गहरा रिश्ता रहा है। (वीवीआईपी हेलीकॉप्‍टर सौदा: 'जूली के जरिए वायुसेना चीफ को दी गई घूस')

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक जब पीवी नरसिंहा राव भारत के प्रधानमंत्री थे, तब वॉल्फगैंग को सोनिया गांधी की लंदन यात्रा के दौरान उनकी जासूसी करने का काम सौंपा गया था। 90 के दशक में नरसिंहा राव सोनिया गांधी के कांग्रेस पार्टी में बतौर नेता उभरने को लेकर कथित तौर पर चिंतित थे। राव सोनिया गांधी के बारे में हमेशा जानकारी रखते थे। उस दौर में सोनिया गांधी ने ब्रिटेन यात्रा के बारे में जैसे ही संकेत दिया, रॉ को उनकी यात्रा के बारे में जानकारी जुटाने को कहा गया। सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक खुफिया एजेंसी ने वॉल्फगैंग को सोनिया गांधी की यात्रा के दौरान उनके बारे में पूरी जानकारी हासिल करने का जिम्मा सौंपा था।


वॉल्फगैंग के बारे में बताया जाता है कि वह हथियारों की खरीद के सौदे में शामिल रहा था और वह इतना असरदार था कि भारतीय खुफिया एजेंसियां करीब तीन दशक पहले ही उसे 'बेशकीमती शख्स' मानती थीं। वॉल्फगैंग को सबसे पहले गैरी सक्सेना ने 'प्रमोट' किया था। गैरी बाद में रॉ के प्रमुख बने थे। वॉल्फगैंग को भारत के राजनीतिक और खुफिया गलियारों में 'वॉल्टर्स' के नाम से जाना जाता था और वह कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में था। इन नेताओं में कई इंदिरा गांधी के बेहद करीबी थे। वॉल्फगैंग को कांग्रेस पार्टी में काफी पसंद किया जाता था और वह 'वॉल्टर्स' नाम से ही पार्टी के नेताओं से मुलाकात करता था। वॉल्फगैंग के रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत से बाहर भारतीय खुफिया अधिकारी उसके पासपोर्ट का 'इंतजाम' करते थे और जब वह दिल्ली में रहता था, तब उसकी 'खातिर' की जाती थी। 80 और 90 के दशकों में पाकिस्तान द्वारा किए गए हथियार खरीद सौदों की जानकारी वॉल्फगैंग ने हासिल कर भारतीय खुफिया एजेंसियों को मुहैया कराई थी।

सोमवार, 11 फ़रवरी 2013

उमर का बयान बेहद आपत्तिजनक और देशहित के खिलाफ है।

नई दिल्‍ली. केंद्रीय मंत्री और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला ने अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। फारुख अब्दुल्ला ने अपने बेटे और जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नक्श-ए-कदम पर चलते हुए कहा है कि अफजल गुरु की फांसी को लेकर जिस तरह की गोपनीयता बरती गई, उससे उन्हें दुख पहुंचा है। अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र को यह बताना चाहिए कि इस गोपनीयता के पीछे असली वजह क्या थी और उसे इस तरह से फांसी क्यों दी गई। अब्दुल्ला ने कहा, 'मुझे इस बात से दुख हुआ है कि अफजल के परिवार वालों तक को उससे मिलने का आखिरी मौका नहीं दिया गया। यह एक ऐसे आदमी का मामला है, जिसे मरने से पहले आखिरी बार अपने परिवार से मिलने की इजाजत दी जा सकती थी।'

हालांकि, पिछले साल 25 फरवरी को अब्दुल्ला ने अफजल गुरु पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा था, 'अफजल गुरु को भारतीय संसद पर हमले की कीमत चुकानी पड़ेगी। जो कोई भी भारत पर हमला करेगा, उसे कीमत चुकानी चाहिए।'

फारुख अब्दुल्ला से पहले जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अफजल की फांसी पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा है कि कानूनी प्रक्रिया का सही तरह पालन नहीं किया गया। फांसी न दी जाती तो बेहतर था। एक चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस फांसी से कश्मीरी लोगों की यह धारणा और बढ़ेगी कि उन्हें इंसाफ नहीं मिलता। इससे कश्मीरियों में अलगाव की भावना और बढ़ेगी।

लेकिन दूसरी तरफ, सोमवार को बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की आलोचना की। बीजेपी ने उमर अब्दुल्ला के उस बयान पर ऐतराज जताया है, जिसमें जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ने अफजल गुरु को गोपनीय ढंग से फांसी दिए जाने पर सवाल उठाया था। बीजेपी ने कहा है कि उमर का बयान बेहद आपत्तिजनक और देशहित के खिलाफ है। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष एम. वेंकैया नायडू ने कहा, 'मैं नहीं जानता कि किस बात ने उन्हें ऐसा बयान देने पर मजबूर किया। मुकदमे की पूरी कार्यवाही बहुत ही निष्पक्ष तरीके से पूरी की गई।'

अफजल गुरु की फांसी के बाद पाकिस्तान में इस खबर से लोगों को 'सांप सूंघा' हुआ है



नई दिल्ली। पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन देश में गतिविधियों को तेजी देने की फिराक में हैं। भारतीय खुफिया एजेंसियों, मिलिट्री इंटेलीजेंस ब्यूरो, रॉ, मल्टी एजेंसी सेंटर (मैक) और आईबी ने घाटी में इस्लामाबाद, कराची, पेशावर और मुजफ्फराबाद से आने वाले फोन कॉल्स को इंटरसेप्ट कर यह जानकारी हासिल की है।


अफजल गुरु की फांसी के बाद भारत में ज्यादातर जगहों पर जश्न मनाया जा रहा है। लेकिन पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और पाकिस्तान में इस खबर से लोगों को 'सांप सूंघा' हुआ है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में इस घटना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और लोग दुखी हैं। बताया जा रहा है कि पीओके में लोग यह मान रहे हैं कि अफजल गुरु की फांसी के बाद कश्मीर की कथित आजादी के लिए संघर्ष और तेज होगा। पाकिस्तान के इशारे पर काम करने वाली पीओके की 'कठपुतली' सरकार ने अफजल गुरु की मौत पर तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित किया है। इस दौरान सभी सरकारी इमारतों पर पाकिस्तान और पीओके सरकार का झंडा आधा झुका हुआ है।

अफजल गुरु की फांसी से पाकिस्तान की राजनीति में भी हलचल मची हुई है। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य और सेनेट कमिटी ऑन डिफेंस के अध्यक्ष मुशाहिद हुसैन सैयद ने अफजल गुरु को बेकसूर बताते हुए इसे न्यायिक मौत करार दिया है। मीडिया से मुखातिब सत्ताधारी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की सहयोगी पार्टी पीएमएल (क़ैद) के नेता मुशाहिद हुसैन ने अफजल की फांसी पर प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त, 2005 के फैसले का हवाला दिया। मुशाहिद हुसैन ने कहा, 'भारत के सुप्रीम कोर्ट ने भी अफजल गुरु पर अपने फैसले में साफ किया था कि अदालत अफजल को फांसी की सजा इसलिए सुना रही है क्योंकि देश का मानस तभी संतुष्ट होगा जब दोषी को सजा-ए-मौत मिले।'

मुशाहिद ने भारत पर तंज कसते हुए कहा, 'अफजल गुरु जैसे बेगुनाह को फांसी देने और उसे अपने परिवार से न मिलने देने की अमानवीय हरकत की आलोचना भारत में अरुंधति रॉय जैसे बुद्धिजीवी कर रहे हैं।' इस मौके पर मुशाहिद भारत के अंदरूनी मामले में भी दखल देने से बाज नहीं आए। मुशाहिद हुसैन ने कश्मीर में अलगाववादी नेता यासीन मलिक की भूख हड़ताल को पूरा समर्थन देने का ऐलान किया। मुशाहिद ने कहा कि एक बेगुनाह को फांसी पर लटकाए जाने से न सिर्फ कश्मीरी बल्कि पाकिस्तानी अवाम में भी गुस्सा है।

पीओके के शहर मुजफ्फराबाद में अफजल गुरु की मौत पर पसरे मातम के बीच कश्मीर की कथित आज़ादी की मांगें भी सुनाई पड़ रही हैं। जम्मू कश्मीर नेशनल स्टूडेंट्स फेडरेशन (एनएसएफ) ने कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल रहे मकबूल भट की 29 वीं पुण्यतिथि से एक दिन पहले यानी रविवार को मोटरसाइकिल रैली निकाली। मकबूल भट अलगाववादी नेता था जिसने जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट नाम का आतंकी संगठन बनाया था। भट को 11 फरवरी, 1984 को तिहाड़ में फांसी दी गई थी।भट पर आरोप था कि उसने एक भारतीय खुफिया अफसर की हत्या की थी। भट के समर्थन में निकली रैली में एनएसएफ के कार्यकर्ता हाथों में पार्टी का लाल झंडा लिए हुए थे और वे ' मकबूल भट जिंदाबाद' और 'भट तुम्हारे अनगिनत समर्थक' जैसे नारे लगा रहे थे। यह रैली एनएसएफ लीडर गुल नवाज बट की कब्र से शुरू होकर चत्तर में एनएसएफ के पू्र्व नेता लियाकत अवान की कब्र पर खत्म हुई। गुल नवाज की मौत 2005 के भूकंप में हुई थी। जबकि लियाकत 1990 में सीमा पार करने की कोशिश में मारा गया था। रैली में शामिल कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए एनएसएफ के सेंट्रल सेक्रेटरी जनरल कामरान बेग ने कहा, 'मकबूल भट के सिद्धांत कश्मीरी राष्ट्र की सभी समस्याओं के लागू किए जाने वाले हल देते हैं। मकबूल उन लोगों के नेता थे, जो किसी भी कीमत पर कश्मीर की आजादी से समझौता नहीं करना चाहते थे।' गौरतलब है कि एनएसएफ एक कट्टरपंथी संगठन है जो जम्मू कश्मीर की आजादी की वकालत करता है।