यह ब्लॉग खोजें

सोमवार, 11 फ़रवरी 2013

उमर का बयान बेहद आपत्तिजनक और देशहित के खिलाफ है।

नई दिल्‍ली. केंद्रीय मंत्री और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला ने अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। फारुख अब्दुल्ला ने अपने बेटे और जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नक्श-ए-कदम पर चलते हुए कहा है कि अफजल गुरु की फांसी को लेकर जिस तरह की गोपनीयता बरती गई, उससे उन्हें दुख पहुंचा है। अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र को यह बताना चाहिए कि इस गोपनीयता के पीछे असली वजह क्या थी और उसे इस तरह से फांसी क्यों दी गई। अब्दुल्ला ने कहा, 'मुझे इस बात से दुख हुआ है कि अफजल के परिवार वालों तक को उससे मिलने का आखिरी मौका नहीं दिया गया। यह एक ऐसे आदमी का मामला है, जिसे मरने से पहले आखिरी बार अपने परिवार से मिलने की इजाजत दी जा सकती थी।'

हालांकि, पिछले साल 25 फरवरी को अब्दुल्ला ने अफजल गुरु पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा था, 'अफजल गुरु को भारतीय संसद पर हमले की कीमत चुकानी पड़ेगी। जो कोई भी भारत पर हमला करेगा, उसे कीमत चुकानी चाहिए।'

फारुख अब्दुल्ला से पहले जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अफजल की फांसी पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा है कि कानूनी प्रक्रिया का सही तरह पालन नहीं किया गया। फांसी न दी जाती तो बेहतर था। एक चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस फांसी से कश्मीरी लोगों की यह धारणा और बढ़ेगी कि उन्हें इंसाफ नहीं मिलता। इससे कश्मीरियों में अलगाव की भावना और बढ़ेगी।

लेकिन दूसरी तरफ, सोमवार को बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की आलोचना की। बीजेपी ने उमर अब्दुल्ला के उस बयान पर ऐतराज जताया है, जिसमें जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ने अफजल गुरु को गोपनीय ढंग से फांसी दिए जाने पर सवाल उठाया था। बीजेपी ने कहा है कि उमर का बयान बेहद आपत्तिजनक और देशहित के खिलाफ है। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष एम. वेंकैया नायडू ने कहा, 'मैं नहीं जानता कि किस बात ने उन्हें ऐसा बयान देने पर मजबूर किया। मुकदमे की पूरी कार्यवाही बहुत ही निष्पक्ष तरीके से पूरी की गई।'

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें