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शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2013

हेलिकॉप्टर घोटाला: दलाल का पिता रहा है कांग्रेस पार्टी का करीबी!

नई दिल्ली. देश को हिला देने वाले 3,760 करोड़ रुपये के हेलिकॉप्टर खरीद घोटाले में दलाली के आरोपी क्रिश्चियन मिशेल के पिता वॉल्फगैंग ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की जासूसी भी कर चुका है। मिशेल ने अपने कारोबार का बड़ा हिस्सा अपने पिता वॉल्फगैंग से विरासत में हासिल किया था। वॉल्फगैंग का इतिहास भारत के ताकतवर राजनीतिक पार्टियों से जुड़ा हुआ है। वॉल्फगैंग का भारत की कांग्रेस पार्टी और भारतीय खुफिया एजेंसियों से 1980 और 90 के दशक में गहरा रिश्ता रहा है। (वीवीआईपी हेलीकॉप्‍टर सौदा: 'जूली के जरिए वायुसेना चीफ को दी गई घूस')

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक जब पीवी नरसिंहा राव भारत के प्रधानमंत्री थे, तब वॉल्फगैंग को सोनिया गांधी की लंदन यात्रा के दौरान उनकी जासूसी करने का काम सौंपा गया था। 90 के दशक में नरसिंहा राव सोनिया गांधी के कांग्रेस पार्टी में बतौर नेता उभरने को लेकर कथित तौर पर चिंतित थे। राव सोनिया गांधी के बारे में हमेशा जानकारी रखते थे। उस दौर में सोनिया गांधी ने ब्रिटेन यात्रा के बारे में जैसे ही संकेत दिया, रॉ को उनकी यात्रा के बारे में जानकारी जुटाने को कहा गया। सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक खुफिया एजेंसी ने वॉल्फगैंग को सोनिया गांधी की यात्रा के दौरान उनके बारे में पूरी जानकारी हासिल करने का जिम्मा सौंपा था।


वॉल्फगैंग के बारे में बताया जाता है कि वह हथियारों की खरीद के सौदे में शामिल रहा था और वह इतना असरदार था कि भारतीय खुफिया एजेंसियां करीब तीन दशक पहले ही उसे 'बेशकीमती शख्स' मानती थीं। वॉल्फगैंग को सबसे पहले गैरी सक्सेना ने 'प्रमोट' किया था। गैरी बाद में रॉ के प्रमुख बने थे। वॉल्फगैंग को भारत के राजनीतिक और खुफिया गलियारों में 'वॉल्टर्स' के नाम से जाना जाता था और वह कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में था। इन नेताओं में कई इंदिरा गांधी के बेहद करीबी थे। वॉल्फगैंग को कांग्रेस पार्टी में काफी पसंद किया जाता था और वह 'वॉल्टर्स' नाम से ही पार्टी के नेताओं से मुलाकात करता था। वॉल्फगैंग के रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत से बाहर भारतीय खुफिया अधिकारी उसके पासपोर्ट का 'इंतजाम' करते थे और जब वह दिल्ली में रहता था, तब उसकी 'खातिर' की जाती थी। 80 और 90 के दशकों में पाकिस्तान द्वारा किए गए हथियार खरीद सौदों की जानकारी वॉल्फगैंग ने हासिल कर भारतीय खुफिया एजेंसियों को मुहैया कराई थी।

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