
इन दिनों अनेक विषय चर्चा में हैं उनमें से एक चर्चा यह कुछ हिंदूवादी संगठनों के सदस्यों की उग्रवादी घटनाओं में लिप्तता भी है। इस पूरी चर्चा के दो भाग हैं। कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने अनेक हिंदूवादी संगठनों पर कुछ गम्भीर आरोप लगाये और इन घटनाओं के आधार पर हिंदू आतंकवाद शब्दावली ही प्रचलित कर दी। बाद में इसकी आलोचना होने के बाद इसे कुछ दक्षिणपन्थी सदस्यों का आतंकवाद कहा गया। देश के कुछ हिंदूवादी संगठनों के के बारे में लगे आरोपों को लेकर देश का प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा इस पूरे विषय में जिस प्रकार इन संगठनों के सदस्यों को क्लीन चिट दे रहा है उसे क्या आप उचित मानते हैं?
यदि आरोपों की जाँच के क्रम में किसी को क्लीन चिट देने का अर्थ जाँच की पूरी प्रकिया को ही बेमानी करार देने जैसा है। यदि कल को ये आरोप सही पाये गये तो इस राजनीतिक दल की छवि पर क्या प्रभाव होगा? यदि यह मान भी लिया जाये कि कुछ हिंदुओं ने उग्रवादी घटनाओं को अंजाम दिया है तो भी क्या राज्य का यह दायित्व नहीं बनता कि वह हर प्रकार के उग्रवाद की जाँच करे ऐसे में एक राजनीति दल होकर किसी को जाँच की रिपोर्ट आने से पहले क्लीन चिट देना कहाँ तक उचित है?
जब कांग्रेस ने हिंदू आतंकवाद शब्दावली से अपने हाथ खींच लिये हैं तो क्या अब कुछ हिंदू सदस्यों की उग्रवादी गतिविधियों में संलिप्तता की निष्पक्ष जाँच होने देनी चाहिये और हिंदू उत्पीडन या किसी संगठन के प्रति दुर्भावना का कार्ड किसी को नहीं खेलना चाहिये।
चर्चा का दूसरा भाग यह है कि शांति और सहिष्णुता के लिये जाने जाने वाले हिंदू ने किस कारण अपने हाथों में हथियार उठा लिये? कृपया इस चर्चा में अपने विचार व्यक्त करें। (sabhaar lokmanch.com)
यदि आरोपों की जाँच के क्रम में किसी को क्लीन चिट देने का अर्थ जाँच की पूरी प्रकिया को ही बेमानी करार देने जैसा है। यदि कल को ये आरोप सही पाये गये तो इस राजनीतिक दल की छवि पर क्या प्रभाव होगा? यदि यह मान भी लिया जाये कि कुछ हिंदुओं ने उग्रवादी घटनाओं को अंजाम दिया है तो भी क्या राज्य का यह दायित्व नहीं बनता कि वह हर प्रकार के उग्रवाद की जाँच करे ऐसे में एक राजनीति दल होकर किसी को जाँच की रिपोर्ट आने से पहले क्लीन चिट देना कहाँ तक उचित है?
जब कांग्रेस ने हिंदू आतंकवाद शब्दावली से अपने हाथ खींच लिये हैं तो क्या अब कुछ हिंदू सदस्यों की उग्रवादी गतिविधियों में संलिप्तता की निष्पक्ष जाँच होने देनी चाहिये और हिंदू उत्पीडन या किसी संगठन के प्रति दुर्भावना का कार्ड किसी को नहीं खेलना चाहिये।
चर्चा का दूसरा भाग यह है कि शांति और सहिष्णुता के लिये जाने जाने वाले हिंदू ने किस कारण अपने हाथों में हथियार उठा लिये? कृपया इस चर्चा में अपने विचार व्यक्त करें। (sabhaar lokmanch.com)
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