नई
दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह कोयला घोटाले
की जांच का ब्यौरा केंद्र सरकार को न दे। सीधे अदालत को रिपोर्ट करे। कोर्ट
ने कोयला ब्लॉक आवंटन में नियमों की अनदेखी किए जाने पर केंद्र सरकार को
आड़े हाथों लिया। बेंच ने कहा कि शुरुआती जांच में ही कोयला ब्लॉक आवंटन
में गड़बड़ी नजर आ रही है। यदि अंतिम रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि होती है
तो सभी आवंटन रद्द कर दिए जाएंगे। कोर्ट ने सीबीआई से जांच के विवरण पेश
करने के लिए हलफनामा दाखिल करने को कहा है। जस्टिस आर एम लोढ़ा और अनिल आर
दवे की बेंच ने यह निर्देश वकील मनोहरलाल शर्मा की याचिका पर दिया। शर्मा
के साथ गैर-सरकारी संगठन कॉमन कॉज ने भी इस मामले में याचिका दायर की है।
सरकार की ओर से एटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती ने दलील दी कि ब्लॉक आवंटन वैध
हैं। इनमें सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। सरकार इतनी बड़ी संख्या
में कोयला ब्लॉकों का आवंटन निरस्त नहीं कर सकती।
2004 से 2009 के बीच कोयला खदानों की बंदरबांट
-कैग की रिपोर्ट में यूपीए सरकार पर आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच कोयला ब्लॉक के आवंटन में अनियमितताएं बरती गईं।
-कुछ खास कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बगैर नीलामी के ही टेंडर बेहद सस्ती कीमतों पर दिए गए।
-कैग के मुताबिक इस घोटाले से सरकारी खजाने को करीब 1.86 लाख करोड़ का नुकसान किया गया है।
-कोयला घोटाले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम भी उछल रहा है। वे नवंबर 2006 से मई 2009 के बीच खुद यह मंत्रालय देख रहे थे।
कोयला नियामक के गठन पर फैसला अब तक नहीं
कोयला क्षेत्र के लिए स्वतंत्र नियामक प्राधिकरण के गठन पर मंत्री
समूह की दो बैठकें हो चुकी हैं। लेकिन वह अभी इस पर विचार ही कर रहा है। इस
संबंध में मंत्री समूह ने कोई फैसला नहीं किया है। कोयला राज्य मंत्री
प्रतीक प्रकाशबापू ने लोकसभा में मंगलवार को यह जानकारी एक लिखित उत्तर में
दी।साभार.दैनिक भास्कर

भारत में रहना होगा वन्दे मातृरम कहना होगा अब न जातिवाद रहेगा हिन्दु जिन्दाबाद रहेगा
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