महाराष्ट्र में सूखे ने राज्य के किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। महाराष्ट्र के 34 जिलों में सूखे का संकट है। इसे
देखते हुए ईजीओएम ने 1207 करोड़ का सूखा पैकेज देने का फैसला किया है।
लेकिन इस पैकेज का कितना सही इस्तेमाल हो पाएगा, इस पर बड़ा सवाल बना हुआ
है।
दूसरी तरफ, 'बेटी
बचाओ' अभियान और महिला सशक्तिकरण के तमाम नारों के बावजूद देश के बड़े
इलाके में महिलाओं पर जुल्म थम नहीं रहे हैं। सूखे और उससे उपजी गरीबी ने
हालात को और खतरनाक बना दिया है। आंध्र प्रदेश में सूखे के चलते जिस्मफरोशी
के लिए मजबूर महिलाओं की तरह ही उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के करीब एक
दर्जन जिलों को मिलाकर बनने वाले बुंदेलखंड में भी आधी आबादी अपनी जान और
इज्जत को बचाने की खामोश जंग लड़ रही है। केंद्र के पैकेज और मध्य प्रदेश,
उत्तर प्रदेश की सरकारों की पहल के बावजूद न तो इस इलाके का पिछड़ापन दूर
हो रहा है और न ही महिलाओं का शोषण।
बच्चों खासकर लड़कियों का 'मामा' कहलाना पसंद करने वाले शिवराज सिंह
चौहान के सूबे में मौजूद बुंदेलखंड के सागर डिवीजन के पांच जिलों-सागर,
छतरपुर, टीकमगढ, पन्ना और दमोह में 2004 से लेकर मार्च, 2011 के बीच सात
सालों में 2230 लड़कियां गायब हुईं। इनमें से 482 लड़कियों का आज तक कोई
पता नहीं चल पाया है। मध्य प्रदेश विधानसभा में 2011 में पेश आंकड़ों के
मुताबिक सागर जिले से 482, पन्ना में 330, छतरपुर में 279, टीकमगढ़ में
345, दमोह में 2004 से 794 लड़कियों की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुईं।
इनमें से टीकमगढ़ में 50, सागर में 71, पन्ना में 88, दमोह में 221 और सागर
में 52 युवतियां आज भी लापता हैं। बुंदेलखंड में लड़कियों की खरीद फरोख्त
करने वाले कई गिरोह आदिवासी बाहुल्य जिलों-पन्ना और दमोह में सक्रिय हैं। बुंदेलखंड की 'बेटियों' को बहलाफुसलाकर जिस्मफरोशी के अड्डों पर बेचा जा
रहा है। देह व्यापार के शिकारियों के निशाने पर ज्यादातर दलित आदिवासी
नाबालिग लड़कियां हैं। कुछ समय पहले छतरपुर जिले के विश्वनाथ कॉलोनी में एक
सेक्स रैकेट का पर्दाफाश करने में पुलिस को कामयाबी मिली थी। इस सेक्स
रैकेट का खुलासा करने में पुलिस की मदद पन्ना जिले के मझगवां की रहने वाली
आदिवासी नाबालिग युवती ने की थी। इस युवती को कुछ साल पहले इस अड्डे पर महज
5 हजार रुपये में बेच दिया गया था। अदालत में बयान देते हुए इस आदिवासी
युवती ने बताया था कि पिता की मौत के बाद वह अपनी आंखों से न देख पाने वाली
मां के साथ रह रही थी। लेकिन तीन साल पहले उसके साथ ही पढ़ने वाली एक
लड़की ने उसे सेक्स के सरगनाओं के हाथ पांच हजार रुपये में बेच दिया। युवती
के मुताबिक उसे मुंबई, झांसी, खजुराहो और दिल्ली के नामी होटलों में भेजा
जाता था। इस युवती की दास्तान से पता चलता है कि 'बहादुरी' की तमाम गाथाओं
के गवाह बुंदेलखंड का आज का सच उसके अतीत की तुलना में बहुत डरावना और
शर्मनाक है। यह सिर्फ एक आदिवासी या दलित लड़की की कहानी नहीं है। बल्कि
बुंदेलखंड के कई जिलों में हाल के सालों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं।
पन्ना जिले के देवेंद्रनगर, छतरपुर के बिजावर और कंचनपुर देह व्यापार के
बदनाम अड्डे हैं। यहां मौका लगते ही देह व्यापार के सरगना लड़कियों को बेच
देते हैं। यहीं से खजुराहो में देसी-विदेशी सैलानियों के लिए बड़े-बड़े
होटलों में लड़कियों को भेजा जाता है।
कोई कितना भी गरीब या फिर हालात का मारा क्यों न हो वह अपनी बेटी को जिस्म
बेचने के लिए कभी नहीं कहेगा। गरीब से गरीब व्यक्ति भी कभी नहीं चाहेगा कि
कभी उसे अपनी बेटी से अपने जिस्म का सौदा करने को कहना पड़े। लेकिन देश का
दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश के रायसेन, विदिशा, राजगढ़ जिले में कुछ
घुमंतू जातियां खासकर बेड़िया जाति के लोग खुलेआम देहमंडी सजाते हैं जहां
उनकी बेटियां वेश्यावृत्ति करती हैं। कई गांवों में यह शर्मनाक काम खुलेआम
चल रहा है। यही नहीं, इन लड़कियों को उनके पिता ही परंपरा के नाम पर इस
धंधे में धकेल रहे हैं। इन विशेष गांवों में सिर्फ बेटियों से ही देह
व्यापार कराया जाता है, वहीँ घर की बहुओं को सिर्फ खाना बनाने और साफ-सफाई
तक सीमित रखा जाता है। बेड़िया जाति के पुरुष अपनी बेटियों को सब कुछ जानते
हुए भी इस दलदल में धकेल देते हैं। इस प्रथा का सबसे बुरा पहलू यही है कि
एक बाप अपनी ही बेटी को जिस्मफरोशी करने के लिए प्रेरित करता है और उसे
इसका कोई पछतावा भी नहीं होता। ऐसा नहीं है कि सरकार इस ओर कुछ नहीं कर रही
लेकिन यह लोग वर्षों से चली आ रही इस हैरान कर देने वाली परपंरा से पीछा
छुड़ाने को तैयार ही नहीं है।
सूखे ने सुखा दिए इंसानी जज्बात
बुंदेलखंड में जिसे कोख से जन्मा उसकी परवरिश के लिए अपने शरीर का
सौदा कर रही हैं महिलाएं और जिस परिवार में ब्याही गईं उसे पालने के लिए
स्टांप पेपर पर बिक रही हैं महिलाएं। बुंदेलखंड को पांच साल के सूखे ने
कितना बर्बाद किया है ये सब जानते हैं, लेकिन स्टांप पेपर पर बिक रही
महिलाओं की दिल दहला देने वाली हकीकत से कम ही लोग वाकिफ है। भुखमरी और
गरीबी की मार झेल रहे इस इलाके के लोगों ने पहले जानवर बेचे, फिर जमीन बेची
अब यहां औरतें नीलाम हो रही हैं। सूखे और कर्ज की मार से बेहाल किसान अपनी
पत्नियों का सौदा कर रहे हैं। इसके एवज में किसान कुछ पैसे लेने को मजबूर
हैं। इन किसानों की पत्नियों की कीमत 4,000 से लेकर 12,000 में लगाई जा रही
है। जितना सुन्दर चेहरा उतना ज्यादा मूल्य। स्टांप पेपर की आड़ में जिस्म
के सौदागर जमकर फायदा उठा रहे हैं। कानून से बचने के लिए कचहरी में वकीलों
की मौजूदगी के सामने स्टांप पेपर पर खरीद-फरोख्त हो रही है। औरतों का सौदा
करने वालों ने इसे नाम दिया है विवाह अनुबंध। एक ऐसा विवाह जिसमें न अग्नि
है, न फेरे हैं, न सप्तपदी है बस 10 रुपये के कागज के टुकड़े पर शादी का
एग्रीमेंट और बिक गई औरत। शादी के ऐसे ही एक एग्रीमेंट के मुताबिक पहले से
ही शादीशुदा सावित्री (बदला हुआ नाम) की हरिप्रसाद नाम के शख्स से दोबारा
शादी हो रही है। सावित्री की उम्र महज 23 साल है जबकि हरिप्रसाद लगभग उसकी
दुगनी उम्र 40 साल का है। सावित्री के दस्तखत को देखकर यह कहना मुश्किल है
कि सावित्री नाम की महिला ने स्टांप पर खुद साइन किया या फिर उससे कहा गया
कि सोचे-समझे बिना कुछ भी उकेर दो। इसी स्टांप पेपर पर ये भी लिखा है कि
सावित्री ने ये फैसला बिना किसी डर के किया। बुंदेलखंड के वकील बताते हैं
कि 10 रुपये के स्टांप पर एक समझौता लिख दिया जाता है कि चूंकि हम वयस्क
हैं और हमारी पत्नी नहीं है इसलिये हम शादी कर रहे हैं। फिर जिसने खरीदा है
वही उसे बेच देता है, इस तरह एक नहीं लाखों मामले हैं यहां पर। ये भी
जरूरी नहीं कि जिसने एक बार औरत खरीदी, वो उम्रभर उसे अपने साथ रखे। कुछ
समय पहले मध्य प्रदेश के नेवाड़ी थाने की पुलिस ने ऐसी ही तीन औरतों को
दोबारा बिकने से बचाया।
बुंदेलखंड की कविता (बदला हुआ नाम) को उसके पति ने ही सिर्फ 8 हजार
रुपयों के लिए बेच दिया। सौदा पक्का करने और इस सौदे को कानूनी दर्जा
दिलाने के लिए कविता का पति बाकायदा खरीदार के साथ कोर्ट भी पहुंचा लेकिन
कविता वहां से भागने में कामयाब रही।
अपनी बदहाली पर कविता ने कहा, 'पति ने हमें बेच दिया है। पहले तो
अच्छी तरह रखा लेकिन जब परेशान किया तो हम मायके चले गए। फिर पंचों ने
फैसला कराया और उसके साथ पहुंचा दिया। फिर उसने झूठा दिलासा दिया और यहां
ले आकर बेच दिया।' कविता बुंदेलखंड की उन हजारों औरतों में से एक है जिनका
सौदा खुद अपनों ने ही कर डाला।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें