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शनिवार, 27 अक्टूबर 2012

अमृत जैसा दूध पिला कर maine tumko बड़ा किया अपने बच्चे से भी छीना पर maine tumko दूध दिया. Gau mata ki pukaar रूखी सूखी खाती थी मैं कभी न किसीको सताती थी मैं कोने में पड़ जाती थी मैं दूध नहीं दे सकती अब तो गोबर से काम तो आती थी मैं मेरे उपलों की आग से तूने भोजन अपना पकाया था गोबर गैस से रोशन कर के तेरा घर उजलाया था क्योंकर मुझको बेच रहा रे उस कसाई के हाथों में ? पड़ी रहूंगी इक कोने में मत कर लालच माँ हूँ मैं. मर कर भी है कीमत मेरी खाल भी तेरे काम आए मेरी हड्डी की कुछ कीमत शायद तू ही घर लाए मैं हूँ तेरे क्रिशन की प्यारी वह कहता था जग से न्यारी उसकी बंसी की धुन पर मैं भूली थी यह दुनिया सारी मत कर बेटा तू यह पाप अपनी माँ को न बेच आप रूखी सूखी खा लूँगी मैं किसीको नहीं सataungi मैं तेरे काम ही आई थी मैं तेरे काम ही आउंगी मैं.

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